असम में विशेष पर्यवेक्षक की नियुक्ति पर उठे प्रश्न
🔹 चुनाव से पहले बढ़ी निगरानी, सवाल भी गहराए 🔹 🔹 निष्पक्ष चुनाव पर भरोसे के बीच सख्ती का संकेत

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क | डीएफ हिंदी
भारत निर्वाचन आयोग Election Commission of India ने असम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए विशेष पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर दी है, लेकिन इस कदम ने चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक ओर आयोग इसे निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में अहम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे चुनावी प्रक्रिया में बढ़ती चुनौतियों का संकेत भी माना जा रहा है।
आयोग ने 15 मार्च को असम समेत चार अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चुनाव कार्यक्रम घोषित किया था। असम में मतदान 9 अप्रैल को और मतगणना 4 मई को होगी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त Gyanesh Kumar ने चुनाव शांतिपूर्ण कराने का भरोसा जताया, लेकिन विशेष पर्यवेक्षक की तैनाती इस भरोसे पर सवाल भी खड़े कर रही है।
नियुक्त किए गए विशेष पर्यवेक्षक मनजीत सिंह, जो राजस्थान कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं, नियमित रूप से असम का दौरा करेंगे और चुनावी तैयारियों की निगरानी करेंगे। आयोग के अनुसार, वे उसकी “आंख और कान” के रूप में काम करेंगे। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इतनी सख्त निगरानी की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम चुनावी प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों या संवेदनशील हालात की ओर इशारा करता है। चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए यह नियुक्ति की है, जो अपने आप में असामान्य स्थिति को दर्शाता है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल निगरानी बढ़ाने से निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो पाएंगे, या इसके पीछे कोई गहरी चिंता छिपी है। ऐसे में असम विधानसभा चुनाव 2026 अब केवल लोकतांत्रिक प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि पारदर्शिता और विश्वास की भी परीक्षा बनते नजर आ रहे हैं।


