एफसीआई प्रबंधन की उदासीनता के खिलाफ काला पखवाड़ा
कर्मचारियों के सब्र का इम्तिहान ले रहा ईपी डिवीजन

🔴 चेतावनी साफ: बात नहीं तो आंदोलन तेज
निश्चय टाइम्स डेस्क। भारतीय खाद्य निगम (FCI) में वर्षों से लंबित कर्मचारियों के मुद्दों को लेकर आखिरकार आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। एफसीआई कर्मचारियों की एकमात्र मान्यता प्राप्त यूनियन, भारतीय खाद्य निगम कर्मचारी संघ (BKNKS) ने 10 फरवरी से 23 फरवरी 2026 तक देशभर के सभी एफसीआई कार्यालयों और डिपो में “काला पखवाड़ा” मनाने की घोषणा कर दी है।
यूनियन का आरोप है कि एफसीआई के ईपी डिवीजन द्वारा लगातार टालमटोल, मनमाना रवैया और निर्णयहीनता के कारण कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामले वर्षों से लंबित पड़े हैं। बार-बार ज्ञापन, बैठकों और संवाद के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकलना प्रबंधन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।
BKNKS ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित होगा। कर्मचारी काली पट्टी पहनकर और प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराएंगे, लेकिन खाद्यान्न संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। यह कदम यह साबित करता है कि कर्मचारी अपने अधिकारों के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा के प्रति भी जिम्मेदार हैं।
हालांकि यूनियन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि 14 दिनों के भीतर ईपी डिवीजन या प्रबंधन की ओर से कोई सकारात्मक और ठोस पहल नहीं होती है, तो आंदोलन को चरणबद्ध और लोकतांत्रिक तरीके से तेज किया जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि खाद्यान्न आपूर्ति प्रभावित होती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी एफसीआई प्रबंधन की होगी।
कर्मचारियों का कहना है कि अब “धैर्य” को उनकी कमजोरी न समझा जाए। सवाल यह है कि क्या एफसीआई प्रबंधन समय रहते जागेगा या फिर देश की खाद्य व्यवस्था को अनावश्यक संकट की ओर धकेला जाएगा?


