दिल की सेहत पर मंडराता खतरा: डायबिटीज, मोटापा और बीपी से बढ़ रही चिंताएं
आधुनिक इलाज से मिल रहा नया जीवन: ब्रजेश पाठक

केजीएमयू में Cardiocon 2026 के मंच से विशेषज्ञों की चेतावनी
निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क। तेजी से बदलती जीवनशैली, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण डायबिटीज, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हृदय रोग विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ये तीनों बीमारियां मिलकर दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ा देती हैं। लापरवाही बरतने पर हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
यह बातें King George’s Medical University (केजीएमयू) के लारी कार्डियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष Dr. Rishi Sethi ने कहीं। वह केजीएमयू परिसर स्थित Atal Bihari Vajpayee Scientific Convention Center में आयोजित Cardiocon 2026 को संबोधित कर रहे थे। यह सम्मेलन Cardiological Society of India द्वारा आयोजित किया गया।

डॉ. ऋषि सेठी ने बताया कि डायबिटीज होने पर खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचता है। इससे हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में अवरोध का खतरा बढ़ जाता है। मोटापा, विशेषकर पेट पर चर्बी का बढ़ना, खराब कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है। वहीं हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है, क्योंकि लंबे समय तक इसका असर बिना लक्षण के चलता रहता है और धीरे-धीरे हृदय की मांसपेशियों को कमजोर कर देता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज के साथ हाई बीपी या मोटापा भी है, तो उसे हृदय रोग होने की आशंका और अधिक रहती है। ऐसे में नियमित जांच, संतुलित आहार और व्यायाम बेहद जरूरी हैं।
Dr. Dhiman Kahali, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कार्डियोलॉजी सोसाइटी ऑफ इंडिया, ने सलाह दी कि मोटापा से बचना, मीठा और नमक सीमित मात्रा में लेना, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड भोजन से दूरी बनाना हृदय की सेहत के लिए अनिवार्य है। नियमित कसरत और तनाव प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
Dr. Akshay Pradhan ने सुझाव दिया कि 30 वर्ष की आयु के बाद नियमित रूप से ब्लड शुगर, बीपी और कोलेस्ट्रॉल की जांच करानी चाहिए। रोजाना कम से कम आधा घंटा टहलना, धूम्रपान से दूरी और वजन नियंत्रण हृदय रोग से बचाव के प्रभावी उपाय हैं।
डिप्टी सीएम ने कहा—प्रदेश बन रहा हृदय चिकित्सा का उभरता केंद्र

Cardiocon 2026 के उद्घाटन अवसर पर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak ने कहा कि केजीएमयू आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से गंभीर हृदय रोगियों को नया जीवन दे रहा है। यहां देश-प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी देशों से भी मरीज बेहतर इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लारी कार्डियोलॉजी विभाग में प्रतिदिन जटिल हृदय रोगों का सफल उपचार किया जा रहा है। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे हैं। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की बदौलत संस्थान हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

डिप्टी सीएम ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में हो रहे सुधार का उल्लेख करते हुए कहा कि पांच हजार की आबादी पर अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। जिला अस्पतालों को अपग्रेड किया गया है और प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। इलाज के साथ-साथ नए डॉक्टर भी तैयार किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में स्वास्थ्य ढांचा और मजबूत होगा।
उन्होंने बताया कि रोबोटिक सर्जरी का विस्तार किया जा रहा है तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से इलाज को अधिक सटीक और तेज बनाया जा रहा है। सरकार केजीएमयू और लारी कार्डियोलॉजी विभाग को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
सम्मेलन में देशभर से आए विशेषज्ञों ने नवीनतम शोध और उन्नत उपचार पद्धतियों पर चर्चा की। यह आयोजन चिकित्सकों के लिए अनुभव साझा करने और नई तकनीकों से अवगत होने का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ।
कार्यक्रम में केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद, डॉ. ऋषि सेठी, डॉ. अक्षय प्रधान, डॉ. गौरव चौधरी, डॉ. शरद चन्द्रा, डॉ. प्रवेश विश्वकर्मा तथा डॉ. धीमान कहाली समेत अनेक वरिष्ठ चिकित्सक उपस्थित रहे।
विशेषज्ञों और सरकार के साझा प्रयासों से यह स्पष्ट संकेत मिला कि यदि जीवनशैली में सुधार और समय पर जांच को प्राथमिकता दी जाए, तो हृदय रोगों के बढ़ते खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही, आधुनिक तकनीक और सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचे के बल पर उत्तर प्रदेश हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभर रहा है।



