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वक्फ संशोधन विधेयक पर मायावती का हमला

 

विपक्ष की खामोशी और बहुजन हितों की अनदेखी पर उठे सवाल

निश्चय टाइम्स लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने एक बार फिर भारतीय राजनीति की गंभीर खामियों पर तीखा हमला बोला है। इस बार निशाने पर है वक्फ संशोधन विधेयक, जिसे लेकर हाल ही में संसद में लंबी चर्चा हुई और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ यह अधिनियम का रूप ले चुका है। मायावती ने न केवल केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ और खासतौर पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की खामोशी पर भी गंभीर चिंता जताई है।

वक्फ संशोधन विधेयक: मामला क्या है?

केंद्र सरकार ने हाल ही में वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 को अधिसूचित किया है, जिसे संसद के दोनों सदनों में पारित किया गया और फिर 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसकी मंजूरी दी। इस अधिनियम के तहत वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का दावा है कि यह प्रावधान पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाया गया है, लेकिन मुस्लिम समुदाय और कई विपक्षी दलों का कहना है कि यह मुस्लिम धार्मिक संपत्तियों में सरकारी हस्तक्षेप और समुदाय की स्वायत्तता को खत्म करने की कोशिश है।

मायावती की तीखी प्रतिक्रिया
मायावती ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर सिलसिलेवार पोस्ट करते हुए राहुल गांधी की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा: “वक्फ संशोधन विधेयक पर लोकसभा में हुई लंबी चर्चा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा कुछ नहीं बोलना क्या उचित है जबकि विपक्ष सीएए की तरह इसे संविधान के उल्लंघन का मामला बता रहा है?”
यह सवाल न केवल राहुल गांधी की भूमिका पर कटाक्ष करता है, बल्कि विपक्ष के भीतर की एकता और अल्पसंख्यक मुद्दों पर स्पष्ट रुख की कमी को भी उजागर करता है। मायावती का यह बयान उस वक्त आया है जब मुस्लिम समाज में इस अधिनियम को लेकर व्यापक नाराजगी देखी जा रही है।

कांग्रेस और भाजपा दोनों जिम्मेदार: मायावती

बसपा प्रमुख ने सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने लिखा “देश में बहुजनों के हित, कल्याण एवं सरकारी नौकरी व शिक्षा आदि में इन वर्गों के आरक्षण के अधिकार को निष्प्रभावी व निष्क्रिय बनाकर इन्हें वंचित बनाए रखने के मामले में कांग्रेस, भाजपा आदि ये पार्टियां बराबर की दोषी हैं। धार्मिक अल्पसंख्यकों को भी इनके छलावे से बचने की जरूरत है।” यह बयान मायावती की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह दोनों राष्ट्रीय पार्टियों पर एक समान दूरी बनाकर चलने की कोशिश करती हैं, साथ ही अपने को ‘वास्तविक बहुजन हितैषी’ के रूप में प्रस्तुत करती हैं।

उत्तर प्रदेश की स्थिति और सरकारी नीतियों की आलोचना
मायावती ने उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज की बदहाल स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है और चुनिंदा लोगों को “कानून हाथ में लेने” की छूट दी जा रही है। उन्होंने लिखा “उत्तर प्रदेश में भी बहुजनों की स्थिति हर मामले में काफी बदहाल व त्रस्त है जबकि भाजपाइयों को कानून हाथ में लेने की छूट है। साथ ही, बिजली व अन्य सरकारी विभागों में बढ़ते हुए निजीकरण से हालात चिंताजनक हैं।” यह बयान न केवल वक्फ मुद्दे पर है, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक आलोचना भी है जिसमें मायावती ने निजीकरण, कानून-व्यवस्था और सामाजिक असमानता जैसे कई पहलुओं को एक साथ जोड़ा है।

वक्फ कानून को निलंबित करने की मांग
मायावती ने इससे पहले गुरुवार को भी केंद्र सरकार से इस अधिनियम को पुनर्विचार के लिए निलंबित करने की मांग की थी। उनका कहना है कि: “हाल ही में पारित अधिनियम में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों को शामिल करने का प्रावधान प्रथम दृष्टया अच्छा नहीं है।”उनका मानना है कि वक्फ संपत्तियां मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावना और परंपरा से जुड़ी होती हैं, ऐसे में उसमें गैर-मुस्लिमों की भागीदारी समुदाय के हितों के खिलाफ जा सकती है।

विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ की चुनौती
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी गठबंधन INDIA को केंद्र के खिलाफ एकजुट विपक्ष के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। लेकिन मायावती का यह सवाल कि विपक्ष ने इस अहम मुद्दे पर पर्याप्त रूप से आवाज क्यों नहीं उठाई, यह गठबंधन की एकता और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि बहुजन समाज पार्टी फिलहाल इस गठबंधन का हिस्सा बनने से कतराती रही है और वह अपनी स्वतंत्र राजनीतिक लाइन बनाए रखना चाहती है।

 

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