उत्तर प्रदेश

बजट खर्च में लापरवाही पर वित्त मंत्री सख्त, कई विभागों के प्रदर्शन पर जताई नाराज़गी

निश्चय टाइम्स डेस्क।

प्रदेश सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जारी किए गए बजट के अपेक्षित उपयोग में लापरवाही सामने आने पर वित्त मंत्री श्री सुरेश कुमार खन्ना ने कड़ा रुख अपनाया है। विधानसभा के नवीन भवन स्थित पारिजात कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने कई विभागों द्वारा बजट व्यय की धीमी गति पर गहरा असंतोष व्यक्त किया और स्पष्ट संकेत दिए कि इस प्रकार की शिथिलता को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में प्राथमिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, सूक्ष्म एवं लघु उद्यम, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास, कृषि, पर्यटन, आवास, महिला कल्याण एवं बाल विकास सहित कुल 18 विभागों के बजट व्यय की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य उभरकर सामने आया कि कई महत्वपूर्ण विभागों में बजट आवंटन के अनुपात में खर्च बेहद कम है, जिससे योजनाओं के धरातल पर क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

वित्त मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार द्वारा जनकल्याण और विकास के लिए जारी किया गया बजट यदि समय पर खर्च नहीं किया जाता, तो उसका सीधा नुकसान आम जनता को होता है। उन्होंने कहा कि बजट का कम उपयोग प्रशासनिक अक्षमता और विभागीय उदासीनता को दर्शाता है। यह स्थिति न केवल विकास कार्यों में बाधा बन रही है, बल्कि सरकार की मंशा और योजनाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित कर रही है।

श्री खन्ना ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने-अपने बजट का शत-प्रतिशत और समयबद्ध व्यय सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य की समीक्षा बैठकों में प्रगति नहीं दिखने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। वित्त मंत्री ने कहा कि योजनाओं को कागज़ों तक सीमित रखना स्वीकार्य नहीं है, बल्कि उन्हें ज़मीन पर उतारना ही प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

बैठक में अपर मुख्य सचिव वित्त श्री दीपक कुमार सहित विभिन्न विभागों के प्रमुख सचिव और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सूत्रों के अनुसार, बजट खर्च में सुस्ती को लेकर आने वाले दिनों में विभागवार कड़ी निगरानी की जाएगी।

यह समीक्षा बैठक एक बार फिर यह संकेत देती है कि बजट आवंटन के बावजूद जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन की रफ्तार सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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