मुर्शिदाबाद में 110 से ज्यादा गिरफ्तार, कई जिलों में हिंसा फैली

वक्फ पर से दंगे ‘दहल’ उठा बंगाल, मुर्शिदाबाद बना हिंसा का केंद्र
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के विरोध में शुरू हुआ प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। खासतौर पर मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद, मालदा, दक्षिण 24 परगना और हुगली जिलों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। बंगाल पुलिस के अनुसार, अब तक 110 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसमें अकेले मुर्शिदाबाद से सबसे ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं।मुर्शिदाबाद जिले के सुती और समसेरगंज इलाके हिंसा के प्रमुख केंद्र रहे, जहां से क्रमशः 70 और 41 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर पथराव, आगजनी और सड़क अवरोध खड़े किए, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। पुलिस का कहना है कि हिंसा को नियंत्रित करने के लिए फोर्स की भारी तैनाती की गई है और लगातार छापेमारी जारी है।
चार जिलों में हिंसा की लपटें
प्रदर्शन की शुरुआत मुर्शिदाबाद से हुई थी, लेकिन जल्द ही यह आग मालदा, दक्षिण 24 परगना और हुगली जिलों में फैल गई। इन सभी जिलों में शुक्रवार को वक्फ संशोधन के विरोध में मस्जिदों से नारेबाजी और जुलूस निकाले गए। कुछ जगहों पर यह जुलूस हिंसक झड़पों में बदल गए, जिसमें कई वाहनों को नुकसान पहुंचा और सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ।
पुलिस का दावा: स्थिति नियंत्रण में, पर तनाव बरकरार
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शनिवार सुबह तक हालात में कुछ हद तक सुधार देखा गया है। हालांकि, स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है। राज्य प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवा पर भी नजर रखने की बात कही है।
वक्फ अधिनियम संशोधन बना विवाद का कारण
विवाद की जड़ है हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025, जिसके तहत वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान किया गया है। मुस्लिम समुदाय का आरोप है कि यह अधिनियम उनकी धार्मिक संपत्तियों में सरकारी हस्तक्षेप की कोशिश है और इससे उनकी स्वायत्तता को खतरा है।घटना पर अब तक राजनीतिक दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं आई हैं। विपक्षी दलों ने सरकार पर साम्प्रदायिक भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया है, वहीं राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी हुई है। कुछ स्थानीय मुस्लिम संगठनों ने अधिनियम को धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया है और जल्दबाजी में कानून लागू करने पर नाराज़गी जताई है।



