क्राइम

‘सुल्तान’ के भेष में ‘नरेश’ का खेल खत्म—लेकिन सवाल सिस्टम पर

21 साल तक पहचान का छल: हिस्ट्रीशीटर ने धर्म बदलकर कानून को दी चुनौती

फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज—सिस्टम की खामियों ने अपराधी को बचाए रखा

निश्चय टाइम्स न्यूज नेटवर्क:
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा करने वाली घटना सामने आई है, जहां मुरादाबाद का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर नरेश वाल्मीकि करीब 21 वर्षों तक फर्जी पहचान के सहारे पुलिस को चकमा देता रहा। उसने न केवल अपना नाम बदलकर ‘सुल्तान’ रख लिया, बल्कि पहनावे और जीवनशैली में भी पूरी तरह बदलाव कर स्थानीय समाज में घुल-मिल गया।

जानकारी के अनुसार, 2005 में फरार होने के बाद वह संभल पहुंचा और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नई पहचान बना ली। आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र हासिल कर लेना यह दर्शाता है कि सिस्टम में कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं, जिनका फायदा उठाकर वह वर्षों तक कानून से बचता रहा।

पुलिस के मुताबिक आरोपी पर हत्या, लूट और गुंडागर्दी जैसे 15 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि एक वांछित अपराधी इतनी लंबी अवधि तक बिना किसी बाधा के कैसे सक्रिय रहा? क्या स्थानीय स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया कमजोर थी या फिर निगरानी तंत्र में चूक हुई?

हालांकि, हाल ही में मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। एसएसपी अनिल कुमार ने इसे इंटेलिजेंस की सफलता बताया, लेकिन यह भी स्पष्ट है कि गिरफ्तारी से ज्यादा अहम वह सवाल हैं जो इस मामले ने खड़े किए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक अपराधी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पहचान सत्यापन और दस्तावेज़ जारी करने की पूरी प्रक्रिया पर पुनर्विचार की जरूरत को उजागर करता है। यदि समय रहते इन खामियों को दूर नहीं किया गया, तो ऐसे मामले दोबारा सामने आ सकते हैं।

यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि इस गिरफ्तारी के बाद सिस्टम में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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