23 लाख शिकायतें, 8,189 करोड़ बचाए—साइबर क्राइम पर सख्ती
I4C की कार्रवाई से साइबर ठगों पर बड़ा प्रहार

निश्चयट टाइम्स डेस्क।: देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार का भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) अब मजबूत हथियार बनकर उभरा है। गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए बताया कि I4C के माध्यम से लाखों शिकायतों का निस्तारण किया गया और हजारों करोड़ रुपये की ठगी को रोका गया है।
संविधान के अनुसार ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ राज्य का विषय है, लेकिन केंद्र सरकार कानून प्रवर्तन एजेंसियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग देकर साइबर अपराध से निपटने की क्षमता बढ़ा रही है। इसी उद्देश्य से वर्ष 2018 में I4C की स्थापना की गई थी, जिसे 1 जुलाई 2024 से गृह मंत्रालय के संबद्ध कार्यालय का दर्जा दिया गया।
वित्तीय धोखाधड़ी पर त्वरित कार्रवाई के लिए 2021 में शुरू की गई ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) बेहद प्रभावी साबित हुई है। 31 दिसंबर 2025 तक 23.61 लाख से अधिक शिकायतों में 8,189 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई जा चुकी है। नागरिकों की सुविधा के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1930 भी संचालित है, जिससे तुरंत रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
सरकार ने ठगों के नेटवर्क पर प्रहार करते हुए 12.21 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख आईएमईआई ब्लॉक किए हैं। वहीं, ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ के जरिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ डेटा साझा कर 9,055 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध लेन-देन को रोका गया है।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए तैयार ‘समन्वय प्लेटफॉर्म’ अपराधियों के अंतर-राज्यीय नेटवर्क का विश्लेषण करने में मदद कर रहा है। ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के जरिए अपराधियों की लोकेशन मैप पर देखी जा सकती है, जिससे कार्रवाई तेज हुई है। अब तक 20,853 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 1.35 लाख से अधिक जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
साइबर धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश और गोवा में ई-एफआईआर प्रणाली भी लागू कर दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित यह मॉडल आने वाले समय में साइबर अपराध के खिलाफ देश की सुरक्षा को और मजबूत करेगा।



