
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) ने बीते नौ महीनों में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दिलाई है। 25 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच हेल्पलाइन ने 79,521 शिकायतों का निस्तारण करते हुए 31 अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 52 करोड़ रुपये की धनवापसी सुनिश्चित कराई। खास बात यह रही कि अधिकांश मामलों का समाधान मुकदमेबाजी से पहले ही करा दिया गया, जिससे उपभोक्ताओं को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना नहीं पड़ा।
ई-कॉमर्स क्षेत्र में सबसे ज्यादा शिकायतें
आंकड़ों के अनुसार, ई-कॉमर्स क्षेत्र में सबसे अधिक 47,743 शिकायतें दर्ज की गईं। इस क्षेत्र में 36.79 करोड़ रुपये से अधिक की धनवापसी कराई गई। इसके बाद यात्रा एवं पर्यटन क्षेत्र में 4.16 करोड़ रुपये, एजेंसी सेवाओं में 1.53 करोड़ रुपये, इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में 1.45 करोड़ रुपये और सामान्य बीमा क्षेत्र में 1.18 करोड़ रुपये की वापसी सुनिश्चित की गई। शीर्ष पांच क्षेत्रों का कुल धनवापसी में 85 प्रतिशत से अधिक योगदान रहा।
डिजिटल मॉडल से त्वरित निस्तारण
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत संचालित राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन डिजिटल अभिसरण मॉडल पर काम करती है। शिकायतों को संबंधित कंपनियों को ऑनलाइन भेजा जाता है और निर्धारित समय सीमा में समाधान सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही मामलों की निरंतर निगरानी और उपभोक्ता फीडबैक भी लिया जाता है।
बिना अदालत के मिला न्याय
हेल्पलाइन के हस्तक्षेप से कई मामलों में उपभोक्ताओं को त्वरित राहत मिली। ई-कॉमर्स में रिफंड लंबित रहने, वाहन में तकनीकी खराबी, गलत खाद्य डिलीवरी और जारी न हुई बीमा पॉलिसी जैसे मामलों में उपभोक्ताओं को पूरी धनवापसी दिलाई गई।
17 भाषाओं में उपलब्ध सुविधा
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन देशभर में 17 भाषाओं में सेवाएं दे रही है। उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915, व्हाट्सएप/एसएमएस 8800001915, वेब पोर्टल, उमंग ऐप और ईमेल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
सरकार का कहना है कि यह पहल डिजिटल बाजार में उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करने और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



