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संजय मल्होत्रा बने भारतीय रिजर्व बैंक के 26वें गवर्नर

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को नया नेतृत्व मिल गया है। 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और राजस्थान कैडर के संजय मल्होत्रा ने आज आरबीआई के 26वें गवर्नर के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने शक्तिकांत दास की जगह ली, जिनका कार्यकाल मंगलवार को समाप्त हो गया।
तीन वर्षों का होगा कार्यकाल
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति केंद्र सरकार की मंत्रिमंडल नियुक्ति समिति द्वारा की गई। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा, जो आज से प्रभावी है। मल्होत्रा के पास वित्त, कराधान, बिजली, सूचना प्रौद्योगिकी और खनन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 33 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
संजय मल्होत्रा का परिचय
संजय मल्होत्रा अपने बैच के टॉपर रहे हैं।
  • शैक्षणिक पृष्ठभूमि: उन्होंने आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और प्रिंसटन विश्वविद्यालय, अमेरिका से सार्वजनिक नीति में मास्टर डिग्री प्राप्त की।
  • राजस्थान से केंद्रीय सरकार तक का सफर: राजस्थान में राजस्व, वित्त, स्वास्थ्य, ऊर्जा और कृषि जैसे विभागों में सेवा देने के बाद वे जनवरी 2020 में प्रतिनियुक्ति पर केंद्र सरकार में आए। यहां उन्होंने ऊर्जा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
केंद्रीय बैंक के लिए नई चुनौतियां
संजय मल्होत्रा की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति नियंत्रण और आर्थिक विकास की चुनौतियों से जूझ रहा है।
  • राजस्व सचिव के रूप में योगदान: दिसंबर 2022 से राजस्व सचिव के रूप में उन्होंने कर नीतियों को तैयार करने और कर संग्रह में सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • जीएसटी परिषद: उन्होंने जीएसटी परिषद के पदेन सचिव के रूप में भी कार्य किया, जो देश में वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली को प्रबंधित करती है।
राजस्थान से आरबीआई तक का सफर
राजस्थान में चीफ सेक्रेटरी बनने के लिए चर्चित नाम रहे संजय मल्होत्रा को केंद्र सरकार ने उनकी प्रतिभा को देखते हुए वापस नहीं भेजा। इससे पहले वे आरईसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्यरत रहे, जो बिजली परियोजनाओं के वित्तपोषण में विशेषज्ञता रखती है।
मल्होत्रा का लक्ष्य और दिशा
गवर्नर के रूप में संजय मल्होत्रा के सामने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना, वित्तीय स्थिरता बनाए रखना, और भारतीय अर्थव्यवस्था को गति देने जैसी प्राथमिक चुनौतियां हैं। उनके नेतृत्व में आरबीआई के नीतिगत फैसले भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

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