उत्तर प्रदेश

पति को सजा देने के लिए नहीं है गुजारा भत्ता: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। एआई इंजीनियर अतुल सुभाष के पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी मामले के बीच एक मामले की सुनवाई में पत्नी को भरण पोषण के मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण की रकम इतनी होनी चाहिए कि पति पर भार न पड़े, लेकिन पत्नी को भी ठीक से जीवन जीने की व्यवस्था हो। साथ ही कोर्ट ने कहा कि कोई ऐसा फिक्स नियम नहीं है जो ज्यों का त्यों लागू कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा है कि क्रूरता कानून का गलत फायदा उठाने की इजाजत किसी को नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि इस मामले में अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अधिकार क्षेत्र के अनुसार, दंपति का विवाह ‘पूरी तरह से टूट चुका था’, लेकिन पत्नी को स्थायी गुजारा भत्ता देने की जरूरत थी। कहा कि ‘जैसा हमने किरण के मामले में कहा था, स्थायी भरण-पोषण की रकम ऐसी होनी चाहिए कि वह पति को सजा देने वाली नहीं हो, बल्कि पत्नी को एक अच्छा जीवनस्तर देने वाली हो।

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया है कि पत्नी को भरण-पोषण की रकम इतनी मिलनी चाहिए कि वह सम्मान के साथ जीवन जी सके, लेकिन यह रकम इतनी भी न हो कि पति को आर्थिक दिक्कत होने लगे। भरण-पोषण का उद्देश्य यह है कि पत्नी के ‘जीवनस्तर’ में गिरावट न आए और वह ठीक से अपनी जिंदगी जी सके।

बता दें कि अतुल के सुसाइड नोट, जिसमें उसकी पत्नी और ससुराल वालों द्वारा उत्पीड़न का जिक्र था, ने देश में दहेज कानूनों के दुरुपयोग पर भारी फोकस ला दिया है। बता दें कि अतुल सुभाष ने मरने से पहले एक घंटे का एक वीडियो बनाया और अपनी आपबीती साझा की जिससे पूरा देश सकते में है। वीडियो में अतुल सुभाष ने पत्नी निकिता, सौरल वाले और फैमिली कोर्ट की जज रीता कौशिक समेत पांच लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है।

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