उत्तर प्रदेशकानपुर

आईआईटी छात्रा का एसीपी पर आरोप: शादी का झांसा देकर किया शोषण, जांच तेज।

आईआईटी की एक छात्रा ने एसीपी मोहसिन के खिलाफ दुष्कर्म और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। आरोपी ने शादी का झांसा देकर छात्रा का यौन शोषण किया और अपनी वैवाहिक स्थिति को लेकर झूठ बोला। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और एसीपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग बढ़ रही है।
कैसे शुरू हुआ मामला
घटना की शुरुआत जून 2024 में हुई, जब एक कार्यशाला के दौरान एसीपी मोहसिन ने बहाने से छात्रा का मोबाइल नंबर लिया। इसके बाद साइबर क्राइम के बहाने छात्रा से बातचीत शुरू की और उसके काम की तारीफों के जरिए नजदीकियां बढ़ाईं। जुलाई में, पीएचडी में दाखिले के दौरान, छात्रा ने मोहसिन की मदद की, जिससे उनकी बातचीत और घनिष्ठता बढ़ गई।
शादी का झांसा देकर शोषण
एसीपी ने खुद को अविवाहित बताया और छात्रा से शादी का वादा किया। अगस्त से दिसंबर 2024 के बीच उसने कई बार छात्रा का शोषण किया। बाद में, जब छात्रा को उसकी शादीशुदा स्थिति का पता चला, तो उसने मोहसिन का झूठ पकड़ लिया।

झूठ और धोखे का पर्दाफाश
मोहसिन ने पत्नी से तलाक का झूठा बहाना बनाया, जबकि वह गर्भवती थी। दिसंबर 2024 में, उसकी पत्नी के सोशल मीडिया पोस्ट ने सारे झूठ का पर्दाफाश कर दिया। पत्नी ने छात्रा को बताया कि उनके बीच तलाक या विवाद जैसी कोई बात नहीं है।
छात्रा ने पुलिस को सौंपीं साक्ष्य
छात्रा ने डीसीपी साउथ अंकिता शर्मा को चैट्स, वीडियो कॉल्स, और आईआईटी परिसर में मोहसिन की मौजूदगी के सबूत दिए। इसके अलावा, पुलिस ने गार्ड और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए और सीसीटीवी फुटेज की मांग की है।
आरोपों की जांच और कार्रवाई
छात्रा ने एसीपी के खिलाफ दुष्कर्म, धोखाधड़ी, जालसाजी, और मानहानि की धाराओं में कार्रवाई की मांग की है। उसने आईआईटी कानपुर में एसीपी और उसके सहयोगियों के प्रवेश पर रोक लगाने की भी अपील की है।
आरोपी की रणनीति
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मोहसिन बातचीत में बेहद सतर्क रहता था। वह सार्वजनिक या पर्सनल नंबर के बजाय एक प्राइवेट नंबर का इस्तेमाल करता था। साथ ही, वह छात्रा से मिलने जाते वक्त अपने सरकारी आवास में सार्वजनिक नंबर छोड़ देता था।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पुलिस ने कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। आईआईटी कानपुर प्रशासन भी मामले में सहयोग कर रहा है।
यह मामला कानून व्यवस्था में काम कर रहे अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है और पीड़ित के लिए न्याय सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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