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Ravichandran Ashwin: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, आईपीएल में खेलते रहेंगे

Ravichandran Ashwin : भारत के दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी है। गाबा टेस्ट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में अश्विन ने यह निर्णय सार्वजनिक किया। 38 वर्षीय अश्विन, जो भारतीय टीम के मुख्य स्पिनरों में से एक थे, अचानक से लिए गए इस फैसले के कारण चर्चा में हैं।
अश्विन का शानदार करियर
अश्विन ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल कीं। उन्होंने अब तक 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट लिए हैं, जो उन्हें टेस्ट क्रिकेट में भारत का दूसरा सबसे सफल गेंदबाज बनाता है। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 59 रन देकर सात विकेट है।

  • फाइव विकेट हॉल: अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट में 37 बार पांच विकेट लेने का कारनामा किया है। यह किसी भी भारतीय गेंदबाज द्वारा सबसे ज्यादा है।
  • कुल विकेट: वनडे में अश्विन ने 156 विकेट, जबकि टी20 में 72 विकेट झटके।
  • बल्लेबाजी में योगदान: टेस्ट में उन्होंने 3503 रन बनाए हैं, जिसमें 6 शतक और 14 अर्धशतक शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय करियर का सफर
  • डेब्यू: अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2010 में हरारे में श्रीलंका के खिलाफ वनडे से डेब्यू किया।
  • आईसीसी टूर्नामेंट्स: अश्विन 2011 विश्व कप और 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे।
  • प्लेयर ऑफ द सीरीज: अश्विन ने टेस्ट क्रिकेट में 11 बार प्लेयर ऑफ द सीरीज अवॉर्ड जीता, जो मुथैया मुरलीधरन के साथ संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा है।
संन्यास के पीछे की वजह और भावुक पल
संन्यास की घोषणा करते समय अश्विन ने कहा, “यह मेरे लिए भावुक क्षण है। मैंने क्रिकेट के हर पल का आनंद लिया और अपने देश के लिए खेलना गर्व की बात रही।” प्रेस कॉन्फ्रेंस में अश्विन के साथ कप्तान रोहित शर्मा और टीम के पूर्व कप्तान विराट कोहली भी मौजूद थे। कोहली ने अश्विन को गले लगाकर विदाई दी।

आईपीएल में खेलते रहेंगे अश्विन
अश्विन ने भले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया हो, लेकिन वह आईपीएल में खेलना जारी रखेंगे। चेन्नई सुपर किंग्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया है।
अश्विन का संन्यास: भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी क्षति
अश्विन का अचानक से लिया गया यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने भारत को कई मैच जिताए और कठिन परिस्थितियों में टीम का साथ दिया। उनके संन्यास से भारतीय स्पिन अटैक में एक बड़ी कमी महसूस की जाएगी।

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