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लखनऊ बैंक लूट: तीन कॉल्स ने खोला राज, 28 घंटों में पुलिस ने सुलझाई वारदात

लखनऊ के चिनहट स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में हुए करोड़ों की लूट का मामला पुलिस ने 28 घंटों में सुलझा लिया। बैंक के लॉकर काटने वाले गिरोह ने वारदात को अंजाम देने से पहले चार दिन तक इलाके की रेकी की थी, लेकिन उनकी तीन मोबाइल कॉल्स ने पुलिस को अहम सुराग दे दिया।
वारदात का खुलासा
शनिवार रात करीब 12 बजे, बिहार के मुंगेर से आए गिरोह ने बैंक की दीवार में सेंध लगाकर लॉकर तोड़ना शुरू किया। अंदर मौजूद चोरों ने लगभग साढ़े तीन घंटे में कई लॉकर काटे। सीसीटीवी फुटेज में हेलमेट पहने एक चोर मोबाइल पर बात करता नजर आया। उसी समय बैंक के बाहर भी एक व्यक्ति मोबाइल पर बात कर रहा था। पुलिस ने इस आधार पर दोनों की आपसी बातचीत का सुराग पाया।

कैसे पकड़ में आए चोर?
पुलिस ने घटना के दौरान सक्रिय मोबाइल नंबरों का डाटा खंगाला। इन्हीं नंबरों की लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स के आधार पर आरोपियों की पहचान हुई। गिरोह का एक सदस्य अरविंद कुमार मुठभेड़ में घायल हुआ, जो बिहार के मुंगेर का निवासी है।
चार दिन की रेकी और पुख्ता योजना
गिरोह ने 17 दिसंबर को लखनऊ आकर चार दिनों तक बैंक और आसपास के इलाकों की रेकी की। उन्होंने सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और बैंक में घुसने के आसान रास्तों की जांच की। शनिवार रात उन्होंने नकाब और हेलमेट पहनकर वारदात को अंजाम दिया।
बैंक अधिकारियों का बयान
इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई। आरबीआई के नियमों के तहत सुरक्षा प्रबंध किए गए थे। बैंक के लॉकर में डबल लॉक सिस्टम है, जिसमें एक चाबी ग्राहक और दूसरी बैंक के पास रहती है।
रात में गार्ड की तैनाती नहीं
जिला अग्रणी प्रबंधक मनीष पाठक के अनुसार, आरबीआई के नियमों के तहत रात में बैंकों के बाहर गार्ड तैनात नहीं होते। सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय पुलिस और गश्ती दल की होती है।
पुलिस के तेजी से किए गए प्रयास और तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण ने इस जटिल वारदात को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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