उत्तर प्रदेशराष्ट्रीय

बड़ौत में अतिक्रमण पर बुलडोजर: आम लोगों के घर टूटे, मंत्रीजी का घर सुरक्षित

बड़ौत की नई बस्ती में सड़क निर्माण के लिए नगर पालिका प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, लेकिन अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई आम लोगों और नेताओं के घरों के बीच भेदभाव का प्रतीक बन गई। वन विभाग के राज्यमंत्री केपी मलिक के घर के बाहर बने चबूतरे और रखे गए जनरेटर को नहीं हटाया गया, जबकि आम जनता के घरों के सामने बने चबूतरे और सीढ़ियां तोड़ दी गईं।
नेता के घर पर बुलडोजर क्यों रुका?
नई बस्ती में सड़क निर्माण के तहत अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया गया। इसमें लोगों के घरों के सामने बनाए गए चबूतरे, सीढ़ियां, और अन्य संरचनाओं को तोड़ा गया। लेकिन जब बात राज्यमंत्री केपी मलिक के घर की आई, तो प्रशासन का बुलडोजर रुक गया। उनके घर के बाहर बना चबूतरा और उस पर रखा जनरेटर जस का तस रहा।
मंत्रीजी का पक्ष और जनता का गुस्सा
राज्यमंत्री केपी मलिक ने दावा किया कि उनका कोई अतिक्रमण नहीं है। उन्होंने कहा, “जितना अतिक्रमण था, वह स्वयं हटवा दिया गया था। सड़क निर्माण के दौरान जनरेटर भी हटा दिया जाएगा।”
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की। उनका कहना है कि जब आम जनता के घरों के चबूतरे और सीढ़ियां तोड़ी गईं, तो मंत्रीजी के घर पर भी समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए थी।
नगर पालिका प्रशासन का बयान
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान सभी अतिक्रमण हटाए जाएंगे। मंत्रीजी के मकान के बाहर सड़क पर रखा जनरेटर और अन्य अवरोध भी हटवाए जाएंगे।
जनता का आक्रोश
स्थानीय लोग प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं। उनका कहना है कि मंत्रीजी के घर के बाहर सजावट के लिए लगाए गए पेड़ भी सड़क पर हैं, जिनका न तो छाया के रूप में उपयोग है और न ही कोई और फायदा।
पक्षपात की राजनीति पर सवाल
इस घटना ने सरकारी कार्रवाई में नेताओं और आम जनता के बीच होने वाले भेदभाव को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन की सख्ती केवल आम लोगों के लिए है, जबकि नेताओं के लिए नियमों में रियायत दी जाती है?

Related Articles

Back to top button