गुजरात के राजकोट में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर विवाद ने तूल पकड़ लिया है। पुराने दाणापीठ इलाके में स्थित तीन दुकानों को अचानक खाली कराने के मामले में व्यापारियों और वक्फ बोर्ड के बीच तनातनी बढ़ गई। दुकानों को खाली कराने के लिए उनके ताले तोड़कर सामान सड़क पर फेंक दिया गया, जिससे व्यापारी नाराज हो गए।
घटना का विवरण
राजकोट के पुराने दाणापीठ इलाके की मस्जिद के पास स्थित तीन दुकानों को खाली कराने के लिए फारूक भाई मुसानी और उनके सहयोगियों ने वक्फ बोर्ड के आदेश का हवाला दिया। 60 साल से किराए पर चल रही इन दुकानों के ताले तोड़े गए और सामान बाहर फेंका गया। शिकायत के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और ए डिवीजन पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया।
वक्फ बोर्ड के आदेश के अनुसार, दुकानदारों पर 15 साल का बकाया किराया और बिजली बिल न चुकाने का आरोप लगाया गया। बोर्ड ने दावा किया कि किराएदारों ने अवैध रूप से किरायेदारी अपने वंशजों को ट्रांसफर कर दी थी। फारूक भाई ने कहा कि दुकानें जर्जर हो चुकी थीं, जिससे मस्जिद को भी नुकसान पहुंच रहा था।
कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ?
दुकानदारों की शिकायत के अनुसार, वक्फ बोर्ड ने दुकानों को खाली कराने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कानून के तहत तीन नोटिस देने, किराएदारों से बातचीत करने, नया किराया समझौता करने और पुलिस को सूचित करने की आवश्यकता थी, जो पूरी नहीं की गई।
स्थानीय विधायक का बयान
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक दर्शिता शाह ने राजकोट पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और इस अवैध कार्रवाई के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड ने अपने ही आदेश में बताए गए नियमों का उल्लंघन किया है।
व्यापारियों की मांग
व्यापारियों ने मांग की है कि दुकानों को खाली कराने में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और वक्फ बोर्ड से कानूनी प्रक्रिया के तहत मामला सुलझाने की अपील की।
पुलिस की कार्रवाई
राजकोट पुलिस ने दुकानदारों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पुलिस वक्फ बोर्ड के आदेश और घटनास्थल की परिस्थितियों की जांच कर रही है।
यह घटना वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर चल रहे विवादों का ताजा उदाहरण है, जो व्यापारी और धार्मिक संगठनों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।
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