उत्तर प्रदेश

जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर मामला: सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी पेश, अगली सुनवाई 5 मार्च को

शाही जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर विवाद में बुधवार को चंदौसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में पहली सुनवाई हुई। इस दौरान जामा मस्जिद पक्ष के अधिवक्ता शकील वारसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति न्यायालय में पेश की। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए अगली तारीख 5 मार्च तय की।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बहस 
मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार इस मामले में फिलहाल सुनवाई नहीं की जा सकती। हालांकि, एसआईटी के अधिवक्ता विष्णु शर्मा और श्रीगोपाल शर्मा ने कहा कि पेश किया गया आदेश न तो सर्टिफाइड है और न ही शपथ पत्र के साथ जमा किया गया है।
सर्वे रिपोर्ट और विवाद का इतिहास
इससे पहले 2 जनवरी को कोर्ट कमिश्नर ने शाही जामा मस्जिद की सर्वे रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में पेश की थी। यह रिपोर्ट 43 पन्नों की थी और इसके साथ लगभग 60 फोटो भी न्यायालय में दाखिल किए गए थे। सर्वे रिपोर्ट में पाई गई सामग्री और तथ्यों के आधार पर पक्षकारों ने अपनी दलीलें दीं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुनवाई के दौरान जिला न्यायालय पर भारी पुलिस और पीएसी बल तैनात रहा। 19 नवंबर को महंत ऋषिराज गिरी और हरिशंकर जैन समेत आठ वादकारियों ने जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर होने का दावा करते हुए वाद दायर किया था।
इस विवाद के चलते 24 नवंबर को सर्वे के दौरान हुई झड़प में पांच लोगों की जान चली गई थी, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई के लिए 5 मार्च की तारीख तय की।

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