धर्म

मंत्र जाप में हर माला का होता है विशेष महत्व

तंत्र एक प्राचीन और गूढ़ विद्या है, जो आत्मिक उन्नति, मानसिक शांति और भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए विभिन्न साधनाओं का उपयोग करती है। तंत्र में माला का विशेष स्थान है, जिसे साधना, पूजा और ध्यान में उपयोग किया जाता है। माला न केवल एक साधारण धार्मिक उपकरण है, बल्कि इसका गहरा आध्यात्मिक और तांत्रिक महत्व भी है। माला के माध्यम से साधक अपनी मानसिकता को केन्द्रित करता है और ईश्वर से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए विभिन्न मंत्रों का जाप करता है।

तंत्र साधना में उपयोग की जाने वाली माला आमतौर पर 108 मनकों (बीजों) की होती है, जिसमें प्रत्येक मनका किसी विशेष देवता या देवी के नाम का जाप करने के लिए निर्धारित होता है। इन मनकों को स्वाभाविक रूप से प्राकृतिक रत्न, लकड़ी या बीज से बनाया जाता है। सबसे अधिक प्रचलित माला तुलसी, चंदन, रुद्राक्ष, और स्फटिक की होती है। प्रत्येक सामग्री का अपनी विशेष ऊर्जा और शक्ति होती है, जो साधक को तंत्र साधना में मदद करती है।

शास्त्रों में रुद्राक्ष को भगवान शिव का अंश माना गया है। इसलिए भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राक्ष की माला का इस्तेमाल किया जाता है। महामृत्युंजय मंत्र, लघु मृत्युंजय और शिव पंचाक्षर मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला पर करने की सलाह दी जाती है।

सफेद और पारदर्शी स्फटिक की माला एकाग्रता, मन की शांति और संपन्नता के लिए खास मानी जाती है। स्फटिक की माला पर मां सरस्वती, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश जी के मंत्रों का जाप किया जाता है। एकाग्रता और मन की शांति के लिए इस माला को धारण भी किया जाता है। वहीं कमलगट्टे की माला पर मां महालक्ष्मी के मंत्रों का जाप किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक पीली हल्दी की माला पर बृहस्पति देव और मां बगलामुखी के मंत्रों का जाप किया जाता है। वहीं मां काली के मंत्रों का जाप करने के लिए काली हल्दी की माला का इस्तेमाल किया जाता है।

लाल और सफेद चंदन की माला को शुभ माना गया है। भगवान विष्णु और भगवान श्रीकृष्ण के मंत्रों का जाप करने के लिए इस माला का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप तुलसी की माला पर भी किया जाता है।

कारोबार में तरक्की के लिए दुकान, ऑफिस या कार्य स्थल पर एक मंदिर बनाएं। अगर मंदिर पहले से है तो कलमगट्टे की माला को बिछारकर उसके उपर माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर उसके उपर रख दें और फिर सुबह-शाम हर रोज पूजा करें। ऐसा करने से व्यापार में अच्छी तरक्की होती है और माता लक्ष्मी की भी कृपा बनी रहती है।

तंत्र में माला का उपयोग ऊर्जा के संचरण के रूप में देखा जाता है। माला का हर एक मनका, साधक की ऊर्जा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने का कार्य करता है। जब हम माला के मनकों पर मंत्र का जाप करते हैं, तो हमारे शरीर की ऊर्जा उस मंत्र की ध्वनि से मिलकर एक सकारात्मक तरंग उत्पन्न करती है। यह तरंग शरीर और मन को शुद्ध करती है, जिससे साधक का मानसिक स्थिति स्थिर होती है और वह तांत्रिक साधना में सफलता प्राप्त कर सकता है।

हिंदू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं के लिए विभिन्न प्रकार की माला का इस्तेमाल किया जाता है। आप तुलसी, वैजयंती, रुद्राक्ष, कमलगट्टे, स्फटिक, पुत्रजीवक, अकीक, रत्न आदि किसी भी तरह की माला से मंत्रों का जाप कर सकती हैं।

तंत्र साधना में माला के माध्यम से जाप करने की विधि विशेष महत्व रखती है। जाप करते समय माला को उंगलियों से घुमाया जाता है और हर मनका के साथ एक मंत्र का उच्चारण किया जाता है। 108 मनकों के साथ पूरा एक चक्कर पूरा करने से एक बार जाप पूरा माना जाता है। यह विधि साधक को मानसिक और शारीरिक स्तर पर शांति और ध्यान की स्थिति में लाने में मदद करती है। माला का सही तरीके से उपयोग करने से मानसिक विकारों का नाश होता है और व्यक्ति को एकाग्रता प्राप्त होती है।

तंत्र साधना में माला का उपयोग मुख्यतः ध्यान और साधना के दौरान किया जाता है। माला का प्रयोग किसी विशेष देवता के मंत्रों का जाप करने में होता है। प्रत्येक माला की एक गहरी तांत्रिक शक्ति होती है, जो साधक को दिव्य ऊर्जा से जोड़ती है। इसके माध्यम से साधक अपने मानसिक विकारों को शांत करने और अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दिव्य मार्ग पर चलने का प्रयास करता है।

तंत्र में माला का महत्व अत्यधिक गहरा है। यह न केवल एक साधारण धार्मिक वस्तु है, बल्कि साधक के मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए आवश्यक एक उपकरण है। माला का सही उपयोग व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मज्ञान और तांत्रिक सिद्धियों की प्राप्ति में सहायक होता है। इसलिए, माला का उपयोग तंत्र साधना में परम आवश्यक माना जाता है, और इसके माध्यम से साधक अपने जीवन को शांति, शक्ति और सफलता की ओर अग्रसर कर सकता है।

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