राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने पार्टी और परिवार के भीतर पद और कद को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत, उन्होंने राजद के संविधान में संशोधन कर अपने परिवार के सदस्य तेजस्वी यादव को पार्टी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया है। यह कदम पार्टी में भीतरघात और विभाजन की आशंका के बीच उठाया गया है, जिससे यह साफ हो गया कि अगर भविष्य में लालू यादव पार्टी की बागडोर नहीं संभाल पाते, तो तेजस्वी यादव ही उनकी जगह लेंगे।
राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पार्टी के अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया अक्टूबर में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले होगी। इसके साथ ही यह भी तय किया गया कि तेजस्वी यादव को ही पार्टी का अगला उत्तराधिकारी माना जाएगा, न कि बड़े बेटे तेज प्रताप यादव या अन्य परिवार सदस्य जैसे मीसा भारती और रोहिणी आचार्य।
लालू यादव का यह फैसला पार्टी के भीतर कई वर्षों से जारी उत्तराधिकारी को लेकर उठते सवालों का जवाब है। इस संशोधन से यह भी साफ हो गया है कि पार्टी में परिवारवाद की छाया में आगे बढ़ने के लिए तेजस्वी यादव का कद बढ़ाया गया है, और भविष्य में किसी भी संकट की स्थिति में उनका ही नेतृत्व स्वीकार्य होगा।
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