उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग राज्य आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा ने मंगलवार को आयोग कार्यालय, इंदिरा भवन, लखनऊ में विभिन्न जनशिकायतों की सुनवाई की। इस दौरान मजदूरी दिलाने, नियुक्ति बहाली और गलत मुकदमों की जांच जैसे अहम मामलों में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।
प्रमुख मामलों पर निर्णय
➡️ मजदूरी दिलाने का फैसला: बहराइच निवासी राधेश्याम विश्वकर्मा ने शिवशक्ति इंटरप्राइजेज के ठेकेदार पर मजदूरी न देने की शिकायत की थी। इस पर पुलिस अधीक्षक आर.एन. सिंह ने उपस्थित होकर प्राथमिकी दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। आयोग अध्यक्ष ने उनकी कार्यशैली की सराहना करते हुए अन्य पुलिस अधिकारियों को गरीबों एवं पिछड़ों की शिकायतों के प्रति संवेदनशील होने की सलाह दी।
➡️ गलत मुकदमों की जांच: अरविंद कुमार वर्मा बनाम पुलिस आयुक्त लखनऊ के मामले में भू-माफियाओं की शह पर गलत तरीके से अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने की शिकायत की गई। सुनवाई में सक्षम अधिकारी अनुपस्थित रहे, जिस पर आयोग अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।
➡️ नियुक्ति बहाली: शाल्वी वर्मा बनाम निदेशक, एनएचएम, उत्तर प्रदेश के मामले में शिकायतकर्ता की नियुक्ति बहाल कर उन्हें जिला चिकित्सालय, सहारनपुर में तैनाती देने की जानकारी आयोग को दी गई।
गैरहाजिर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
सुनवाई के दौरान कई अधिकारी गैरहाजिर रहे, जिस पर राजेश वर्मा ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि अगली सुनवाई में अनुपस्थित पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध शासन को पत्र भेजकर कार्यवाही की सिफारिश की जाएगी।