संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) की हालिया जांच में पाया गया है कि बांग्लादेश में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दमन में पूर्व सरकार की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस कार्रवाई में हजारों लोग घायल हुए, और 1,400 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई।
क्या कहती है रिपोर्ट?
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क के अनुसार, बांग्लादेश में छात्रों द्वारा शुरू किए गए विरोध प्रदर्शनों पर हुई हिंसा संगठित रणनीति का हिस्सा थी। जांच में यह भी पाया गया कि 12-13% मृतक बच्चे थे, और सैकड़ों लोगों को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया, हिरासत में प्रताड़ित किया गया और लिंग-आधारित हिंसा का शिकार बनाया गया।
पूर्व सरकार की भूमिका
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट बताती है कि पूर्व सरकार के वरिष्ठ नेताओं और सुरक्षा अधिकारियों ने हिंसक तत्वों के साथ मिलकर इन अपराधों को अंजाम दिया। जांच में शामिल 900 से अधिक गवाहों की गवाही से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार विरोध को दबाने के लिए योजनाबद्ध दमन किया गया था।
अंतरराष्ट्रीय अपराध की श्रेणी में घटनाएं
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ये मानवाधिकार उल्लंघन इतने गंभीर हैं कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय अपराध माना जा सकता है। इस पर अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) द्वारा मुकदमा चलाए जाने की संभावना है, क्योंकि बांग्लादेश रोम संविधि का सदस्य है।
सरकार की मिलीभगत से हत्याएं
वोल्कर टर्क ने कहा, “यह क्रूर दमन पूर्व सरकार द्वारा सत्ता बनाए रखने की संगठित रणनीति थी। हमारे पास सबूत हैं कि सरकारी तंत्र ने लक्षित हत्याओं और हिंसा को अंजाम दिया, जो मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।”
संयुक्त राष्ट्र ने बांग्लादेश में न्याय और जवाबदेही सुनिश्चित करने की अपील की है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।