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पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को साकार करेगा बायोपॉलिमर संयंत्र : योगी

सीएम ने लखीमपुर खीरी के कुंभी चीनी मिल परिसर में 2,850 करोड़ की लागत से देश के प्रथम बायोपॉलिमर संयंत्र का किया शिलान्यास
संयंत्र से बनी बोतल, प्लेट, कप और कैरी बैग्स पूरी तरह से होंगे डिस्पोजेबल, 3 माह में खुद ही मिट्टी में मिल जाएंगे

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी के कुंभी चीनी मिल परिसर में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2,850 करोड़ रुपये की लागत से देश के पहले बायोपॉलिमर संयंत्र का शिलान्यास किया। यह संयंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के दृष्टिकोण को साकार करेगा। यह पहल न केवल भारत के लिए एक नई शुरुआत है, बल्कि दुनिया भर में पर्यावरण की रक्षा करने और प्रदूषण कम करने के प्रयासों में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। इस बायोपॉलिमर संयंत्र के माध्यम से पाली लैक्टिक एसिड आधारित बायोप्लास्टिक का उत्पादन किया जाएगा, जो पूरी तरह से पर्यावरण-अनुकूल होगा। संयंत्र में बनाई जाने वाली बोतलें, प्लेट्स, कप, और कैरी बैग्स पूरी तरह से डिस्पोजेबल होंगे और महज तीन से छह महीनों में मिट्टी में मिलकर खुद-ब-खुद नष्ट हो जाएंगे। इससे प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी, जो एक प्रमुख पर्यावरणीय समस्या बन चुकी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संयंत्र के शिलान्यास के अवसर पर कहा, “यह संयंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘पर्यावरण संरक्षण’ के संकल्प को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। इस संयंत्र के उत्पाद न केवल स्थानीय बाजार की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि भारत को पर्यावरण के लिए बेहतर विकल्प भी प्रदान करेंगे। यह बायोपॉलिमर संयंत्र भारत का पहला इंटीग्रेटेड यूनिट होगा। मुख्यमंत्री ने इसे ‘निवेश का महाकुंभ’ करार दिया और कहा कि इस परियोजना से न केवल पर्यावरणीय संकट को हल करने में मदद मिलेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। उन्होंने बताया कि संयंत्र से हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा और यह किसानों की आय को भी बढ़ावा देगा। योगी ने स्थानीय युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट के कार्यक्रम की बात की, जिससे वे इस उद्योग में सीधे जुड़ सकें। इस संदर्भ में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संयंत्र के साथ एमओयू करेगी, जिससे स्थानीय आईटीआई, पॉलिटेक्निक और महाविद्यालयों से छात्र प्रशिक्षित हो सकें और उन्हें स्थानीय रोजगार मिल सके।

मुख्यमंत्री ने ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण बढ़ते पर्यावरण संकट पर चिंता जताई और कहा कि असमय बारिश और सूखे जैसी समस्याएं और भी गंभीर हो रही हैं। यूपी सरकार ने इन समस्याओं से निपटने के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक को अपनाने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी हानिकारक अपशिष्ट का नदियों और नालों में रिसाव न हो। बताया कि उत्तर प्रदेश में 45 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव आया है, जिसमें से 15 लाख करोड़ रुपये का निवेश पहले ही हो चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि इस निवेश से 7 से 8 लाख युवाओं को रोजगार मिलेगा, और अगले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र में और निवेश आने की संभावना है।

इस बायोपॉलिमर संयंत्र के अलावा, यूपी में चीनी उद्योग के विकास के लिए भी नई संभावनाएं खुलेंगी। मुख्यमंत्री ने बलरामपुर चीनी मिल लिमिटेड को इस परियोजना से जुड़े क्षेत्रों के साथ सहयोग करने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संयंत्र पर्यावरण संरक्षण, मेक इन इंडिया, और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक मील का पत्थर साबित होगा। इस अवसर पर मंत्री नितिन अग्रवाल, राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार, मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, और प्रमुख सचिव चीनी उद्योग वीणा कुमार मीना भी उपस्थित थे।

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