Chamoli: हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र में बने थे मजदूरों के आवास, चार की गई जान

उत्तराखंड के चमोली जिले में माणा गांव से करीब तीन किलोमीटर आगे माणा पास में शुक्रवार सुबह छह बजे हिमस्खलन हुआ, जिसमें 55 श्रमिक फंस गए। सेना और आईटीबीपी ने दो दिनों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद अधिकांश श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया, लेकिन इस हादसे में चार लोगों की जान चली गई।
क्यों बनाए गए मजदूरों के आवास संवेदनशील क्षेत्र में?
अब सवाल उठ रहे हैं कि मजदूरों के आवास ऐसी जगह पर क्यों बनाए गए जो पहले से ही हिमस्खलन के लिहाज से संवेदनशील रही है? स्थानीय निवासी धर्मेंद्र नैथानी का कहना है कि “इस क्षेत्र में पहले भी हिमस्खलन की घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद मजदूरों को वहीं बसाया गया, जो एक गंभीर लापरवाही है।”

BRO की कार्यशैली पर सवाल
बीआरओ (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) की कार्यदायी संस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। संस्था के ठेकेदार ने श्रमिकों के निवास के लिए पहाड़ी के ठीक नीचे एक जगह चुनी, जिससे हिमस्खलन की चपेट में सभी मजदूर आ गए। इस हादसे के बाद प्रशासन पर भी जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है।
भूवैज्ञानिकों ने दी थी चेतावनी
भूवैज्ञानिक डॉ. एसपी सती ने बताया कि यह क्षेत्र पहले से हिमस्खलन के लिए संवेदनशील है। “अलकनंदा और बद्रीनाथ घाटी में छोटे-छोटे ग्लेशियर हुआ करते थे, जिनके पिघलने के बाद गड्ढे बने। इन गड्ढों में ताजा बर्फ जमा हो जाती है, लेकिन इसकी पकड़ कमजोर होती है और भार बढ़ने पर यह टूटकर नीचे गिर जाती है, जिससे हिमस्खलन होता है।”
डॉ. सती ने 2021 में गिरथी घाटी में हुए हिमस्खलन के बाद चेतावनी दी थी कि इस तरह के संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर सतर्कता बरतनी चाहिए। लेकिन माणा में मजदूरों के कैंप को लेकर कोई एहतियाती कदम नहीं उठाए गए।

अब क्या कदम उठाने होंगे?
इस हादसे के बाद प्रशासन और बीआरओ को इस तरह की आपदाओं से बचाव के लिए श्रमिकों के रहने की सुरक्षित व्यवस्था करनी होगी। हिमस्खलन संभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्य करते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों से बचा जा सके।



