
-सरकारी हस्तक्षेप और मुस्लिम बंदोबस्त की स्वायत्तता पर सवाल, कई धाराओं को बताया असंवैधानिक
नई दिल्ली। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सांसद डॉ. मनोज झा और फैयाज अहमद ने वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह संशोधन अधिनियम मुस्लिम धार्मिक बंदोबस्तों (वक्फ संपत्तियों) में अनुचित सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ावा देता है और यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 26, 29, 30 और 300ए का उल्लंघन करता है।
याचिका में यह तर्क दिया गया है कि नया अधिनियम वक्फ बोर्ड की संरचना को प्रभावित करता है और धार्मिक-शैक्षणिक संस्थानों को संचालित करने की समुदाय की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। याचिकाकर्ताओं ने अधिनियम की कई धाराओं को चुनौती दी है, जिनमें धारा 3(आर) विशेष रूप से विवाद का विषय है। इसमें “उपयोगकर्ता द्वारा वक्फ” की अवधारणा को समाप्त कर दिया गया है, जिसे पहले सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने मान्यता दी थी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि अब वक्फ घोषित करने के लिए औपचारिक दस्तावेज की अनिवार्यता और मुस्लिम पहचान की 5 वर्षों तक पुष्टि की शर्त, वक्फ की ऐतिहासिक परंपराओं और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ है। साथ ही, केंद्रीय वक्फ परिषद और राज्य वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्य नियुक्ति, धार्मिक संस्थानों की स्वायत्तता पर सीधा हमला है।
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा है कि यह अधिनियम “एक बार वक्फ, हमेशा वक्फ” के सिद्धांत के विरुद्ध है और यह अल्पसंख्यकों के शैक्षणिक व सांस्कृतिक अधिकारों के संरक्षण को भी प्रभावित करता है।
सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया है कि वह इस अधिनियम के असंवैधानिक प्रावधानों को रद्द करे और मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करे। यह याचिका देश में अल्पसंख्यक अधिकारों और राज्य के हस्तक्षेप पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकती है।



