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बुद्ध पूर्णिमा 2025: ज्ञान, करुणा और शांति का पर्व – जानिए इसका महत्व

आज वैशाख पूर्णिमा के पावन दिन पर बुद्ध पूर्णिमा का पर्व देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है, जिन्होंने करुणा, ज्ञान और अहिंसा के संदेश से दुनिया को नई दिशा दी। बुद्ध पूर्णिमा हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इसी दिन राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ था, जो बाद में गौतम बुद्ध के रूप में विख्यात हुए। उन्होंने बोधगया में पीपल के पेड़ के नीचे तपस्या करते हुए ज्ञान की प्राप्ति की और बौद्ध धर्म की स्थापना की।

आज के दिन हिंदू धर्मावलंबी भी गंगा जैसे पवित्र नदियों में स्नान, व्रत, दान, तर्पण आदि करते हैं। चंद्र दर्शन कर अर्घ्य देना, दान देना और पूजा-अर्चना करना पुण्यदायक माना जाता है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा पर रवि योग, बुधादित्य योग और वरियन योग का विशेष संयोग बना है, जो इसे और भी खास बनाता है। बौद्ध धर्म के अनुयायी भगवान बुद्ध की प्रतिमाओं को स्नान कराकर, पुष्प चढ़ाते हैं, धूप-दीप जलाकर उपदेशों को याद करते हैं। चीन, जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार जैसे देशों में भी यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

बुद्ध की शिक्षाएं आपके जीवन में शांति, करुणा और ज्ञान का प्रकाश भरें।

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