भारत से युद्ध में तिनके सा पाकिस्तान, हृदयनारायण दीक्षित ने किया पर्दाफाश!

भारत और पाकिस्तान के बीच यह पाँचवाँ युद्ध है। इससे पहले पाकिस्तान ने समय-समय पर आतंकवादियों के माध्यम से सैकड़ों हत्याएं करवाईं, जिन्हें अघोषित युद्ध की श्रेणी में रखा जा सकता है। भारत ने शुरुआत में केवल आतंकवादी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की, पाकिस्तानी सेना या नागरिकों को निशाना नहीं बनाया, लेकिन पाकिस्तान ने पूरी सैन्य ताकत से जवाबी कार्रवाई शुरू की। भारत ने अब तक 13 से अधिक पाकिस्तानी शहरों को निशाना बनाया है। पूरा राष्ट्र भारत सरकार और सेना के साथ एकजुट होकर खड़ा है।
दुनिया का कोई भी बड़ा देश इस युद्ध में पाकिस्तान के समर्थन में नहीं है, बल्कि भारत की प्रारंभिक कार्रवाई का समर्थन किया गया है। पाकिस्तान एक स्वाभाविक देश नहीं है। इसका जन्म 1947 में ‘डायरेक्ट एक्शन’ और रक्तपात के बीच हुआ था। राष्ट्र निर्माण के लिए भूमि, जन और संस्कृति की आवश्यकता होती है, जो भारत जैसे प्राचीन राष्ट्र में विद्यमान हैं। भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से पृथ्वी को माता मानती आई है, जिसकी गवाही अथर्ववेद के भूमि सूक्त में मिलती है।
इसके विपरीत पाकिस्तान मजहब के आधार पर बना राष्ट्र है, जिसकी अपनी कोई संस्कृति नहीं है। बंटवारे के समय भारतीय भूमि से अलग हुआ पाकिस्तान उसी भूमि पर स्थापित हुआ, जहाँ वैदिक काल में सरस्वती, सिन्धु और झेलम जैसी नदियाँ बहती थीं और जहाँ वेद रचे गए। पर कट्टरपंथ ने इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जड़ों को नकारते हुए केवल मजहब के आधार पर राष्ट्र का दावा किया। जनरल मुनीर ने दो राष्ट्र के सिद्धांत को फिर से दोहराते हुए यह कहा कि पाकिस्तानी और भारतीय सोच, संस्कृति, धर्म और रीति-रिवाज अलग हैं। जबकि सच्चाई यह है कि पूर्वज तो साझे हैं।

भारत में आज भी सभी मजहबों को समान अधिकार प्राप्त हैं, जबकि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक, विशेषकर हिंदू, असुरक्षित हैं। उनके मंदिर तोड़े जा रहे हैं। वहां सेना लोकतांत्रिक सरकारों को नियंत्रित करती है या गिरा देती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि पाकिस्तान की सेना आतंकवाद को संस्थागत समर्थन देती है। यही कारण है कि पाकिस्तानी सेना के नेतृत्व में आतंकवादियों की ‘यूनिवर्सिटी’ चल रही है।
पाकिस्तान एक सैनिक छावनी में तब्दील हो चुका है। इस्लामी विद्वान दुर्रानी ने कहा था कि “पाकिस्तान एक छावनी बनेगा, जहां से भारत का इस्लामीकरण होगा।” आधी बात सच हुई — पाकिस्तान छावनी तो बना, लेकिन भारत अपराजित राष्ट्र रहा।
1947 के बाद से पाकिस्तान निरंतर विघटन की ओर बढ़ता रहा है — 1948 का कबायली हमला, 1965 का युद्ध, 1971 में 93,000 सैनिकों का आत्मसमर्पण और बांग्लादेश का निर्माण — सब इसकी पुष्टि करते हैं। आज बलोचिस्तान आजादी की मांग कर रहा है।
भारत का यह युद्ध निर्णायक है। भारत एक प्राचीन राष्ट्र है, जबकि पाकिस्तान मजहब आधारित सैनिक छावनी। राष्ट्र बनने के लिए केवल सत्ता या सरकार नहीं, बल्कि आत्मा, संस्कृति और इतिहास की आवश्यकता होती है — जो पाकिस्तान में नहीं है। यही कारण है कि वह अंततः विघटन का शिकार होगा।


