
बाबा साहेब की पहली तस्वीर संसद में मेरे पिता ने लगवाई थी
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक बार फिर अपने पिता और दिग्गज दलित नेता रामविलास पासवान को भारत रत्न देने की मांग की। उन्होंने भावुक लहजे में कहा, “मैं उनका बेटा हूं, मेरी लालसा रहेगी कि उन्हें भारत रत्न मिले, लेकिन इससे हटकर, मेरी पार्टी ने भी विधिवत रूप से यह मांग रखी है।”
रामविलास पासवान का राजनीतिक करियर पांच दशक से अधिक लंबा रहा, और उन्होंने छह प्रधानमंत्रियों के साथ कार्य किया। दो बार उनका नाम गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हुआ। चिराग ने कहा कि उनके पिता ने हर सरकार में सामाजिक न्याय की वकालत की और उसे धरातल पर उतारा।
बाबा साहेब की पहली तस्वीर का संदर्भ
चिराग ने कांग्रेस और विपक्ष पर भी तीखा तंज कसा। राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि जब वे “जय भीम” के नारे लगाते हैं और बाबा साहेब के विचारों का गुणगान करते हैं, तो उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि 1989 तक संसद में बाबा साहेब की कोई तस्वीर नहीं थी। पहली बार उनकी तस्वीर संसद में रामविलास पासवान ने ही श्रम मंत्री रहते हुए लगवाई थी।
उन्होंने कहा, “जब संसद के सेंट्रल हॉल में एक ही परिवार के तीन-तीन प्रधानमंत्रियों की तस्वीरें लगी थीं, तब संविधान निर्माता की तस्वीर तक नहीं थी।” इससे यह साफ जाहिर होता है कि रामविलास पासवान ने सामाजिक न्याय को प्रतीकात्मक नहीं, व्यावहारिक रूप में आगे बढ़ाया।
बिहार की राजनीति पर फोकस
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे फिर से बिहार की राजनीति में उतरेंगे, तो उन्होंने साफ कहा, “मैं बिहार जाना चाहता हूं, लेकिन किसी पद की महत्वाकांक्षा से नहीं। मेरी सोच है—बिहारी फर्स्ट। मैं व्यवस्था निर्माण के लिए काम करूंगा, न कि मुख्यमंत्री पद के लिए।”
चिराग ने यह भी याद दिलाया कि वह पहले भी एनडीए से अलग होकर बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट के नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरे थे। अब उनका फोकस सत्ता नहीं, सिस्टम सुधारना है।



