
ओडिशा में हाल के विधानसभा चुनावों में तीसरे स्थान पर खिसकने के बावजूद कांग्रेस ने एक बार फिर राज्य में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए कमर कस ली है। इसी क्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी 11 जुलाई को भुवनेश्वर में एक विशाल रैली को संबोधित करेंगे, जो न सिर्फ बीजेपी सरकार के खिलाफ विरोध का मंच होगी बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार भी करेगी।
कांग्रेस ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रहे अपराधों, दलित-आदिवासी उत्पीड़न और सरकार की वादाखिलाफी को मुख्य मुद्दा बनाया है। पार्टी का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में 65,000 से ज्यादा महिलाएं और बच्चे लापता हुए हैं, जिसमें से अधिकतर मामले मानव अंग व्यापार और यौन हिंसा से जुड़े हैं।
कांग्रेस ने इस गंभीर मसले की जांच के लिए वरिष्ठ महिला नेताओं की एक विशेष टीम भेजी थी जिसमें दीपा दासमुंशी, प्रणीति शिंदे, एस. जोथिमणि, रंजीता रंजन और शोभा ओझा शामिल थीं। उन्होंने राज्य में महिलाओं की स्थिति का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी।
राज्य में भाजपा सरकार के एक वर्ष पूरा होने पर कांग्रेस सवाल उठा रही है। लोकसभा सांसद सप्तगिरि उलाका ने कहा कि सरकार ने जो वादे किए थे — जैसे 51,000 नौकरियों के लिए तीन औद्योगिक पार्क, मछुआरों को ₹10,000 की आर्थिक सहायता, 3,000 रुपये वृद्धावस्था पेंशन और छात्रों को मुफ्त लैपटॉप — वे सिर्फ नारों तक सीमित रह गए।
वहीं कांग्रेस ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने जिस तरह पुरी में धार्मिक आयोजन के दौरान भगदड़ को संभाला, वह उनकी प्रशासनिक अक्षमता को दर्शाता है। इस घटना में तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। कांग्रेस प्रभारी अजय कुमार लल्लू, जो हाल ही में नियुक्त हुए हैं, लगातार राज्य में डटे हुए हैं। उन्होंने कहा, “हम न केवल बीजेपी बल्कि पूर्ववर्ती बीजद सरकार से भी सवाल पूछ रहे हैं। पिछले एक दशक से राज्य में दोनों ही पार्टियां शासन में रही हैं और जनता को सिर्फ ठगा गया है।”



