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“होम स्टे नीति-2025 के तहत 743 भवनों का पंजीकरण”

निश्चय टाइम्स, लखनऊ। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा हाल ही में लागू की गई ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 के सकारात्मक प्रभाव सामने आने लगे हैं। इस नई नीति के तहत बड़ी संख्या में ग्रामीण होमस्टे इकाईयों के स्वामियों ने पंजीकरण और विकास में रुचि दिखाई है। बेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होमस्टे नीति-2025 के अंतर्गत अब तक प्रदेश भर में 743 से अधिक होमस्टे और 30 एग्रो फार्म स्टे इकाइयां पंजीकृत कराई गई है।
उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 राज्य में स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देगी। खासकर उन क्षेत्रों में जहां अभी तक पर्यटन गतिविधियां सीमित थीं। स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के लिए तैयार करने को लेकर उत्साहित हैं। इसके तहत अब प्रदेश के धार्मिक व पर्यटन स्थलों पर भी पर्यटकों को रुकने के लिए होम स्टे की आरामदेह एवं सस्ती सुविधा मिल सकेगी।
जयवीर सिंह ने बताया कि पर्यटकों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। वर्ष 2024 में 64.90 करोड़ पर्यटकों ने विभिन्न पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया था। राज्य में बढ़ते पर्यटकों के ठहरने के लिए ज्यादा से ज्यादा कमरों की आवश्यकता होगी। उप्र0 पर्यटन विभाग का मानना है कि इसे ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट एवं होम स्टे नीति-2025 द्वारा पूरी की जा सकती है। राज्य में होमस्टे पंजीकरण में बढ़ोतरी पर्यटकों की पसंद में आए बदलाव को भी दर्शाता है। अब पर्यटक पारंपरिक होटलों की बजाय स्थानीय संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ने वाले अनुभवों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि इस नीति के तहत आगरा, मथुरा, वृंदावन और प्रयागराज जैसे प्रमुख स्थलों पर होमस्टे इकाइयों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। मथुरा के जैत गांव, जो तुलसी की मालाओं के हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है, वहां भी सांस्कृतिक अनुभवों से जुड़े होमस्टे और फार्म स्टे पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। प्रयागराज में महाकुंभ-2025 के दौरान 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की मेज़बानी में होमस्टे इकाइयों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसी प्रकार, घूरपुर, श्रृंगवेरपुर और गढ़ा कटरा जैसे क्षेत्र अब होमस्टे हब बनकर उभरे हैं।
पर्यटन मंत्री ने बताया कि राज्य में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चल रही हैं। पर्यटक अब न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं बल्कि स्थानीय संस्कृति, खानपान और जीवनशैली से भी जुड़ रहे हैं। घूमने आए सैलानी अब पारंपरिक होटलों की बजाय ऐसे निवास स्थलों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां वे स्थानीय लोगों के साथ रहकर उनके व्यंजन, बोली और जीवनशैली को नजदीक से देख-समझ रहे हैं। यह नीति केवल प्रदेश में रहने के विकल्पों को ही नहीं बढ़ा रही है, बल्कि सेवा की गुणवत्ता और पर्यटन का स्तर भी ऊंचा कर रही है। पर्यटन विभाग का यह पहल उत्तर प्रदेश के वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य में भी सहायक सिद्ध होगा।

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