गोंडा के ‘यूपी टाइगर’ आनंद सिंह नहीं रहे

गोंडा: केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के पिता एवं पूर्व सांसद आनंद सिंह उर्फ ‘अन्नू भैया’ का रविवार देर रात लखनऊ में निधन हो गया। अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके निधन की खबर से गोंडा समेत पूर्वांचल के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई।
राजनीति में ‘यूपी टाइगर’ के नाम से पहचान
1939 में जन्मे आनंद सिंह गोंडा की राजनीति में एक प्रभावशाली हस्ती रहे। उन्हें ‘यूपी टाइगर’ के नाम से जाना जाता था। वे गोंडा लोकसभा सीट से 1971, 1980, 1984 और 1989 में कांग्रेस पार्टी के टिकट पर सांसद निर्वाचित हुए। पूर्वांचल की राजनीति में उनका ऐसा दबदबा था कि कांग्रेस सिर्फ उन्हें सिंबल देती थी और टिकट बांटने का काम वह स्वयं करते थे। मनकापुर कोट से जुड़ी उनकी राजनीतिक पकड़ इतनी मजबूत थी कि जिसका नाम वह तय करते थे, वह सांसद, विधायक या जिला पंचायत अध्यक्ष बन जाता था।
वर्ष 2012 में आनंद सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर गौरा विधानसभा से विधायक चुने गए और अखिलेश यादव सरकार में कृषि मंत्री बनाए गए। इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। हालांकि उनका प्रभाव क्षेत्रीय राजनीति में हमेशा बना रहा।
राम मंदिर आंदोलन की पृष्ठभूमि में 1991 में हुए आम चुनाव में उन्हें भाजपा के बृजभूषण शरण सिंह ने हराया था। 1996 में उनकी पत्नी केतकी देवी सिंह ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में आनंद सिंह (एसपी उम्मीदवार) को हराया। इसके बाद से उन्होंने संसदीय राजनीति से दूरी बना ली।
फिलहाल उनके पुत्र कीर्तिवर्धन सिंह गोंडा से भाजपा सांसद हैं और हाल ही में उन्हें विदेश राज्यमंत्री का पदभार मिला है। आनंद सिंह के निधन को प्रदेश की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है। उनके करीबी और समाजसेवी उन्हें एक सादगीपूर्ण, मगर प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के तौर पर याद कर रहे हैं।


