डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ की छात्राएँ है स्वाति और कनक सिंह

स्वाति और कनक सिंह ने युगांडा पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल टूर्नामेंट में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम किया रोशन
स्वाति ने एकल में रजत, युगल में स्वर्ण और मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक जीता, जबकि कनक सिंह ने एकल और युगल में कांस्य पदक प्राप्त किए
मंत्री नरेन्द्र कश्यप ने दोनों छात्राओं को दी शुभकामनाएँ
दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में लाने हेतु किए जा रहे प्रयास साकार रूप ले रहे हैं
यह उपलब्धि दिव्यांगजन सशक्तिकरण मॉडल की सफलता है
अवसर मिलने पर कोई भी शारीरिक सीमा प्रतिभा को नहीं रोक सकती
-मंत्री नरेन्द्र कश्यप
उत्तर प्रदेश की बेटियों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ की छात्राएँ स्वाति और कनक सिंह ने युगांडा की राजधानी कैंपाला में 1 से 6 जुलाई 2025 तक आयोजित ‘Uganda Para Badminton International Tournament’ में अद्भुत प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर प्रदेश और देश को गौरवांवित किया है।
प्रदेश के पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने इन दोनों छात्राओं को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि योगी सरकार द्वारा दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा में लाने हेतु किए जा रहे प्रयास आज साकार रूप ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वाति और कनक सिंह की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण मॉडल की सफलता की मिसाल है। उन्होंने कहा कि इन बेटियों ने यह प्रमाणित किया है कि यदि अवसर, संसाधन और संबल मिलें तो कोई भी शारीरिक सीमा प्रतिभा की उड़ान को रोक नहीं सकती।
उल्लेखनीय है कि स्वाति ने महिला एकल SU-5 वर्ग में रजत पदक, महिला युगल SL‑3-SU‑5 में स्वर्ण पदक तथा मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक हासिल किया, वहीं कनक सिंह ने महिला एकल SL-4 वर्ग और महिला युगल में कांस्य पदक प्राप्त किए। विश्व बैडमिंटन फेडरेशन द्वारा मान्यता प्राप्त इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 50 से अधिक देशों के पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए इन छात्राओं ने अपनी उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजय सिंह ने इस उपलब्धि को विश्वविद्यालय की अकादमिक और पुनर्वास व्यवस्था की सफलता बताते हुए कहा कि स्वाति और कनक सिंह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर यह सिद्ध किया है कि हमारी छात्राएँ किसी भी मंच पर अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रेरणादायक क्षण पूरे प्रदेश की बेटियों और दिव्यांगजनों को नई दिशा देगा।
क्रीड़ा एवं योग प्रकोष्ठ के निदेशक प्रोफेसर पाण्डेय राजीवनयन ने कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय की पुनर्वास नीतियों और खेल प्रशिक्षण की गुणवत्ता का प्रमाण है। कोच इरशाद अहमद ने भावुक होकर कहा कि इन दोनों खिलाड़ियों ने यह संदेश दिया है कि सच्ची लगन, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती। उन्होंने कहा कि यह सफलता पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और वे भविष्य में और भी ऊँचाइयाँ छुएंगी, ऐसा विश्वास है।


