जनपद मथुरा के मुखराई और जैतपुर गांव ग्रामीण पर्यटन के उभरते केन्द्र बने

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर की ओर ले जाने में ग्रामीण होमस्टे योजना की अहम भूमिका होगी-जयवीर सिंह
उत्तर प्रदेश पर्यटन नीति-2022 राज्य को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। प्रदेश सरकार के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने में पर्यटन विभाग सतत प्रयासरत है। आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में अब तक 700 से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक सहयोग मिल रहा है। कृष्ण की नगरी मथुरा के मुखराई और जैत गांव इसके उदाहरण बन रहे हैं।
प्रदेश पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीण पर्यटन में अपनी विशेष पहचान बना चुका मुखराई गांव, मथुरा जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर गोवर्धन-राधाकुंड क्षेत्र के पास स्थित है। यह गांव राधा रानी के ननिहाल के रूप में जाना जाता है। यहां की खास पहचान पारंपरिक चरकुला नृत्य है, जिसमें महिलाएं जलते हुए दीपकों को सिर पर संतुलित कर रंगारंग प्रस्तुति देती हैं। मुखराई गांव आने वाले पर्यटकों को महज छह किलोमीटर की दूरी पर गोवर्धन, वृंदावन (20 किमी.), बरसाना (26 किमी) और कृष्ण जन्मभूमि (25 किमी) जैसे धार्मिक स्थल देखने को मिलते हैं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ने बताया कि मुखराई गांव में कई होम स्टे विकसित हो चुके हैं, जहां पर्यटकों को रहने के साथ, गांव के पारंपिरक व्यंजन का आनंद भी मिलता है। वृंदावन आने वाले पर्यटक अब केवल धार्मिक स्थलों तक ही सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें गांव की सुंदरता और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी आनंद लेने का अवसर मिलेगा। मुखराई के प्रधान जगदीश प्रसाद ने बताया हमारे यहां आने वाले पर्यटकों को पारंपरिक पोशाक बनते देखने और स्वयं बनाने का अनुभव प्राप्त होता है।
जयवीर सिंह ने बताया कि जैत गांव की प्रधान ममता देवी ने बताया, कि हमारे यहां सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उनको स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत, तुलसी माला निर्माण का प्रशिक्षण दिया गया और आधुनिक मशीन भी उपलब्ध करायी गई जिससे काम आसानी से हो जाता है। यहां होम स्टे में रुकने वाले पर्यटकों को न सिर्फ तुलसी माला बनते देखने बल्कि स्वयं बनाने का अनुभव भी प्राप्त होगा। इसके अलावा हमारे यहां बनाए जाने वाले मिट्टी के बर्तनों की कार्यशालाएं भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। इस पहल से हमारे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिल रहा है और हमारी आय में वृद्धि हो रही है।
जयवीर सिंह ने बताया कि मानसून का मौसम प्रदेश के ग्रामीण पर्यटन स्थलों को जानने का सबसे उपयुक्त समय है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है। हरियाली अपनी चरम पर होती है। पर्यटकों को गांवों में त्योहार, खेती के साथ और सांस्कृतिक गतिविधियों की चहल-पहल देखने को मिलती है। मुखराई और जैत जैसे गांव उन आगंतुकों के लिए आदर्श हैं, जो शहरी शोर-शराबे से दूर जाकर भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ना चाहते हैं। विभाग ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं विकसित कर रही है, ताकि अधिक से अधिक पर्यटक यहां आकर स्थानीय जीवनशैली का अनुभव कर सकें।


