राज -उद्धव की भेंट से गरमाई की सियासत

मुंबई | महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को एक बड़ा मोड़ देखने को मिला जब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने अपने चचेरे भाई और शिवसेना (यूबीटी) नेता उद्धव ठाकरे के 65वें जन्मदिन पर ‘मातोश्री’ जाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। यह मुलाकात दोनों नेताओं के बीच बर्फ पिघलने और पुराने रिश्तों की नई शुरुआत के रूप में देखी जा रही है।
राज ठाकरे के साथ मनसे नेता बाला नंदगांवकर और नितिन सरदेसाई भी मौजूद थे। अंदर जाकर उन्होंने स्वर्गीय बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर के सामने उद्धव के साथ तस्वीर खिंचवाई और बालासाहेब की प्रतिष्ठित कुर्सी पर बैठकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
दोनों नेताओं की मुलाकात के राजनीतिक मायने
राज ठाकरे की मातोश्री यात्रा को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर तब जब महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव और विधानसभा चुनावों की तैयारियां ज़ोरों पर हैं। यह याद रखना अहम है कि राज ठाकरे ने 2006 में शिवसेना से अलग होकर मनसे बनाई थी और तब से दोनों नेताओं के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण रहे हैं।
इस मुलाकात से कुछ दिन पहले ही दोनों नेता एक सार्वजनिक मंच पर पहली बार साथ नजर आए थे। वर्ली की एक रैली में मराठी अस्मिता और हिंदी भाषा थोपे जाने के मुद्दे पर दोनों ने एक सुर में बात की। उस रैली में उद्धव ठाकरे ने साफ कहा था, “हम साथ रहने के लिए साथ आए हैं, ये तो बस एक ट्रेलर है, असली फिल्म अभी बाकी है।” वहीं, राज ठाकरे ने मजाकिया लहजे में कहा कि “देवेंद्र फडणवीस ने वो कर दिखाया जो बालासाहेब भी नहीं कर पाए।”
क्या शिवसेना (यूबीटी) और मनसे मिलकर चुनाव लड़ेंगे?
उद्धव ठाकरे ने संकेत दिए हैं कि वे और राज ठाकरे मुंबई सहित 29 नगर निगमों में मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। इससे पहले मनसे के इगतपुरी सम्मेलन में भी राज ठाकरे ने संभावित गठबंधन पर खुलकर चर्चा की थी और कहा था कि “सही समय पर सही फैसला लिया जाएगा।”
एक नए अध्याय की शुरुआत?
करीब दो दशकों के तनाव के बाद राज और उद्धव की यह मुलाकात ना सिर्फ ठाकरे परिवार के भीतर रिश्तों की बहाली की ओर इशारा करती है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं।



