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हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकते: अमित शाह

- केंद्रीय गृह मंत्री ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद और कांग्रेस की नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान आतंकवाद और कांग्रेस की नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत अब आतंकवाद के “पतन के कगार” पर खड़ा है और इसके पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और ठोस नीतियां हैं।
- कांग्रेस को घेरा
गृह मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस की “तुष्टिकरण की नीति” और “राजनीतिक उदारता” ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया। उन्होंने कहा, “कांग्रेस ने कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान को दे दिया, लेकिन अब मोदी सरकार उसे वापस लाने का संकल्प रखती है।” - “हिंदू आतंकवादी नहीं हो सकते”
मालेगांव विस्फोट मामले में एनआईए कोर्ट द्वारा सभी आरोपियों को बरी किए जाने के संदर्भ में अमित शाह ने दोहराया, “हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकते।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने “भगवा आतंकवाद” का झूठा नैरेटिव फैलाया, जिससे देश के निर्दोष नागरिकों को बदनाम किया गया। - चिदंबरम पर तीखा हमला
पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि वे आज सवाल कर रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर निर्णायक था या नहीं। शाह ने पलटवार करते हुए पूछा, “अगर 1965 और 1971 के युद्ध निर्णायक थे, तो आतंकवाद क्यों नहीं रुका?” - 26/11 और आरएसएस पर बयान
शाह ने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के 26/11 को लेकर दिए बयान का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या वे आतंकवादियों को बचाने की कोशिश कर रहे थे? उन्होंने कहा, “हमारी एजेंसियों के पास सबूत हैं कि हमलावर पाकिस्तान से थे, फिर भी कांग्रेस नेताओं ने आरएसएस का नाम घसीटा।” - भाजपा और शिवसेना का हमला जारी
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि कांग्रेस को ‘भगवा आतंकवाद’ शब्द फैलाने के लिए देश से माफी मांगनी चाहिए। शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे ने कहा कि चिदंबरम और कांग्रेस ने जानबूझकर यह नैरेटिव फैलाया, जो अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
राज्यसभा की इस गरमागरम बहस ने एक बार फिर “भगवा आतंकवाद” और आतंकवाद की परिभाषा पर सियासी भूचाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर भाजपा इसे कांग्रेस की साजिश बता रही है, वहीं कांग्रेस को अब सार्वजनिक रूप से इन सवालों का जवाब देना पड़ सकता है।



