वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग का पलटवार

सभी पार्टियां आयोग के लिए बराबर, पारदर्शिता पर कोई सवाल नहीं
नई दिल्ली। विपक्ष के लगातार लगाए जा रहे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने रविवार को सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि आयोग सभी राजनीतिक दलों के साथ बराबरी का व्यवहार करता है और किसी भी स्थिति में अपने संवैधानिक कर्तव्यों से पीछे नहीं हटेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष की आशंकाओं और आरोपों पर विस्तार से जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि भारत का संविधान हर 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिक को मतदान का अधिकार देता है और चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि इस अधिकार की रक्षा हो। आयोग के लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है, सभी दल एक समान हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि “आयोग किसी भी दल की तरफ झुका हुआ नहीं है, बल्कि सभी के लिए समान रूप से कार्य करता है।”
विपक्ष द्वारा लगाए गए मतदाता सूची में गड़बड़ियों और त्रुटियों के आरोपों पर सीईसी ने बताया कि आयोग ने बिहार से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत की है। इसमें बूथ स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ सभी राजनीतिक दलों द्वारा नामित 1.6 लाख बीएलए (बूथ लेवल एजेंट्स) शामिल होकर एक मसौदा सूची तैयार कर रहे हैं, ताकि किसी भी तरह की गलती को सुधारा जा सके।
ज्ञानेश कुमार ने विपक्ष की ओर से मतदाताओं की निजी तस्वीरों और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की घटनाओं पर भी नाराज़गी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी मतदाता की व्यक्तिगत छवि को उसकी अनुमति के बिना मीडिया में दिखाना उचित है? चुनाव आयोग का मानना है कि इस तरह का रवैया मतदाताओं के अधिकारों और निजता का हनन करता है।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया में एक करोड़ से अधिक कर्मचारी, 10 लाख से ज्यादा बूथ लेवल एजेंट्स और 20 लाख से अधिक पोलिंग एजेंट्स काम करते हैं। इतने पारदर्शी माहौल में किसी वोट चोरी की गुंजाइश ही नहीं है। उन्होंने साफ किया कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं और सबूत मांगने पर कोई ठोस जवाब नहीं मिलता।
अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, “चुनाव आयोग भारत की जनता के साथ खड़ा है। जब आयोग को राजनीति का निशाना बनाया जाता है, तब भी हम निडर होकर हर वर्ग, हर धर्म और हर आयु वर्ग के मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए चट्टान की तरह डटे रहेंगे।



