राष्ट्रीय

ऑपरेशन सिंधु पर भारतीय वायुसेना का पराक्रम

 एयर चीफ ने वीर जवानों को किया सलाम

गाजियाबाद स्थित हिंडन एयर बेस बुधवार को उस समय गर्व से गूंज उठा जब भारतीय वायुसेना ने अपना 93वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया। इस मौके पर आकाश की ऊंचाइयों को छूने वाले वायुसेना के जांबाज योद्धाओं को सम्मानित किया गया। इन वीरों में वे 97 फाइटर पायलट भी शामिल थे जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंधु’ के दौरान पाकिस्तान पर निर्णायक बढ़त हासिल कर भारतीय वायुसेना के पराक्रम को एक नई ऊंचाई दी।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस अवसर पर जवानों को संबोधित करते हुए कहा, “ऑपरेशन सिंधु के दौरान भारतीय वायुसेना ने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संकटों के समय भी अदम्य साहस का परिचय दिया। हमारी वायुसेना ने राहत सामग्री और आवश्यक उपकरणों को रिकॉर्ड समय में पहुंचाया और कई बार जीवन को जोखिम में डालकर मानवता की सेवा की।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय वायुसेना के प्रत्येक अधिकारी और जवान ने ‘सेवा परमो धर्म’ के आदर्श को साकार किया है।

इस अवसर पर हुए एयरफोर्स डे परेड में वायुसेना की ताकत का भव्य प्रदर्शन किया गया। सुखोई, राफेल और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों ने आकाश में करतब दिखाते हुए दुश्मन पर बिजली की तरह टूट पड़ने की वायुसेना की क्षमता का प्रदर्शन किया। वहीं गरुड़ कमांडो ने जमीनी ऑपरेशन्स में अपनी दक्षता दिखाकर दर्शकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में तीनों सेनाओं के प्रमुखों और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने शहीदों को नमन किया। इसके बाद वायुसेना प्रमुख ने 97 बहादुर फाइटर्स को वीरता पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इनमें वे अधिकारी भी शामिल थे जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंधु’ के दौरान चार घंटे की अभूतपूर्व कार्रवाई में सफलता हासिल की थी। इस अभियान में वायुसेना ने न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य चौकियों को निशाना बनाया बल्कि भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को भी और मजबूत किया।

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि आज का समय वैश्विक अनिश्चितताओं से भरा हुआ है, ऐसे में वायुसेना की भूमिका पहले से कहीं अधिक अहम हो गई है। उन्होंने कहा, “वायु शक्ति अब राष्ट्रीय सुरक्षा का निर्णायक साधन बन चुकी है। भारतीय वायुसेना हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है — चाहे वह सीमाओं की रक्षा हो या मानवीय आपदा में सहायता।”

उन्होंने जवानों को नयी तकनीक अपनाने, आत्मनिर्भर भारत के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को प्राथमिकता देने और नए युग के युद्ध कौशल में निपुण होने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वायुसेना न केवल युद्ध में, बल्कि शांति के समय में भी राष्ट्र निर्माण की अग्रणी शक्ति है।

93वें स्थापना दिवस का यह समारोह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह उस अदम्य साहस, समर्पण और देशभक्ति का प्रतीक था जो भारतीय वायुसेना की पहचान है। चार घंटे के ‘ऑपरेशन सिंधु’ में दिखाए गए साहस ने यह साबित कर दिया कि भारतीय वायुसेना केवल आसमान की रक्षा करने वाली शक्ति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा में बसने वाला गौरव है।

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