विद्युत कर्मचारियों का बड़ा विरोध: मुख्यमंत्री योगी से हस्तक्षेप की मांग

उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग में बड़े पैमाने पर पदों की कटौती को लेकर विवाद बढ़ गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि विभाग में मनमाने तरीके से हजारों पद समाप्त किए जा रहे हैं, जिससे कर्मचारियों का भविष्य खतरे में है। समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है।
समिति ने घोषणा की है कि शुक्रवार से सभी जिलों में पुनः विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। समिति ने कहा कि सरकार द्वारा लागू किया जा रहा “वर्टिकल सिस्टम” दरअसल निजीकरण की दूसरी रणनीति है। इस प्रणाली के तहत शहरी क्षेत्रों में विभागों का पुनर्गठन किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों के पदों में भारी कटौती हो रही है।
कर्मचारियों ने कहा कि पहले पदों को घटाया जाएगा और फिर यह तर्क दिया जाएगा कि कार्य सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है, जिसके बाद निजी कंपनियों को काम सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। समिति ने चेतावनी दी कि निजीकरण और वर्टिकल सिस्टम दोनों का कड़ा विरोध किया जाएगा।
मध्यांचल के लेसा (लखनऊ इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई एडमिनिस्ट्रेशन) में ही करीब 2055 नियमित पद और 6000 संविदा कर्मियों के पद समाप्त होने की संभावना है। समिति ने सीएम को भेजे गए पत्र में बताया कि अधीक्षण अभियंताओं के पद 12 से घटाकर 8, अधिशासी अभियंता 50 से 35, सहायक अभियंता 109 से 86 और अवर अभियंता 287 से घटाकर 142 कर दिए जाएंगे। वहीं टीजी-2 के पद 1852 से घटकर केवल 503 रह जाएंगे।


