नौगाम थाने में जोरदार धमाका: 8 की मौत, 27 घायल – जांच में बड़ी चूक?

श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में शुक्रवार देर रात हुए एक भीषण धमाके ने पूरे शहर को दहला दिया। इस हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 27 अन्य घायल हो गए। यह विस्फोट उस समय हुआ जब पुलिस अधिकारी और फोरेंसिक टीमें “सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल” मामले में हाल ही में जब्त किए गए भारी मात्रा के विस्फोटकों की सैंपलिंग कर रही थीं।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है कि विस्फोट किस सामग्री से हुआ, लेकिन प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जब्त किया गया विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट और एनपीएस था, जो अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। पुलिस ने बताया कि यह पूरा जखीरा आतंकियों के एक मॉड्यूल से बरामद किया गया था, जिसका भंडाफोड़ 19 अक्टूबर को इसी थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले के आधार पर किया गया था।
इस मॉड्यूल से जुड़े ओजीडब्ल्यू की गिरफ्तारी के बाद हरियाणा के फरीदाबाद से लगभग 2,900 किलो विस्फोटक और भारी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए थे। यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि पूरा विस्फोटक नौगाम थाने में रखा गया था या इसकी केवल कुछ मात्रा यहां लाई गई थी।

धमाके के तुरंत बाद पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया और थाने की ओर जाने वाले सभी रास्तों को बंद कर दिया। देर रात कई छोटे-छोटे विस्फोट भी होते रहे, जिसके कारण बम निरोधक दस्ते को तुरंत बचाव कार्य शुरू करने में कठिनाई हुई।
घटना में घायल हुए अधिकारियों को उजाला सिग्नस अस्पताल, श्री महाराजा हरि सिंह अस्पताल और सेना के 92 बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बेस अस्पताल को अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि कई घायल कर्मियों की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
आईजी सीआरपीएफ पवन कुमार शर्मा और जम्मू-कश्मीर के डीजीपी नलिन प्रभात ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है, जबकि पुलिस विशेषज्ञ टीम यह जांच कर रही है कि विस्फोट लापरवाही, तकनीकी चूक, या फिर आतंकी साजिश का हिस्सा था।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—क्या इतना बड़ा विस्फोटक जखीरा एक थाने में रखना सुरक्षित था? क्या विस्फोट सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा था? या फिर इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की भी भूमिका हो सकती है?



