एस आई आर डी मे विभिन्न विषयो पर विशेषज्ञो द्वारा दिया जा रहा है प्रशिक्षण

निश्चय टाइम्स, लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व व निर्देशन में दीन दयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान बख्शी का तालाब, लखनऊ में विभिन्न सरकारी, अर्धसरकारी विभागो /संस्थाओ के अधिकारियों व कर्मचारियों व विभाग व रचनात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण देकर उन्हें और अधिक दक्ष व सक्षम बनाने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में दीनदयाल उपाध्याय राज्य ग्राम्य विकास संस्थान, बख्शी का तालाब, लखनऊ द्वारा संस्थान द्वारा महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू के संरक्षण व प्र0 अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के मार्ग निर्देशन तथा प्रशासनिक नियंत्रण में, संस्थान मे दो प्रमुख प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, यथा – 01- से 03 दिसंबर तक, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों तथा सम्बन्धित अधिकारियों हेतु, ” लर्निंग बाई डूइंग ” विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया,
जिसमें कुल 76 प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया गया। 01 से 06 दिसंबर तक, भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में नवनियुक्त सहायक अनुभाग अधिकारियों हेतु , चौथे चरण में कुल 74 अधिकारियों के लिए, लखनऊ जनपद के आसपास जनपदों में राज्य सरकार की कानून व्यवस्था के दृष्टिगत, पुलिस स्टेशनों व तहसीलों की कार्यपद्धति तथा विकास की दृष्टि से ब्लाक व ग्राम पंचायत स्तरीय शासकीय संस्थाओं तथा अधिकारियों/ कार्मिकों की कार्यशैली के व्यवहारिक अध्ययन हेतु, ” विलेज अटैचमेंट ” विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के दौरान विशिष्ट अतिथि आध्यात्मिक संत शुभ साहिब जी महराज द्वारा समस्त प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि शिक्षक का दायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण है, शिक्षकों द्वारा प्राथमिक रुप से शिक्षा के प्रथम चरण में, भारतीय परिवेश में, आदर्श संस्कारों को सृजित करने का पुनीत कर्तव्य होता है, जिससे कि बाल्यकाल के विद्यार्थी अपने गुरु जन , माता-पिता एवं सभी श्रेष्ठ जनों का आदर करें। शिक्षण कार्य के समय शिक्षकों को भी अपना आचरण व अपना नैतिकता पूर्ण भाव उत्तम रखना चाहिए। बच्चों को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए, जिससे कि बच्चे सदैव किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें तथा भोजन खान-पान सात्विक एवं पौष्टिकता से भरपूर हो, क्योंकि नैतिकता पूर्ण एवं आदर्श संस्कारों में पले-बढ़े बच्चे देश के आदर्श नागरिक बनते हैं, जिनका राष्ट्र के विकास में उन्नयन पूर्ण स्थान होता है।
अध्यक्षीय संबोधन के अन्तर्गत महानिदेशक संस्थान एल० वेंकटेश्वर लू द्वारा प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि मिशन कर्मयोगी कार्यक्रम के अन्तर्गत बार-बार सभी सम्मानित विशिष्ट अतिथि वार्ताकारों व सन्तों द्वारा आप सभी को यह बताया जाता है कि समस्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नियोजित विषयों जो जनहित के लिए हैं, उन विषयों को हम कैसे शासकीय संस्थाओं व सम्बन्धित कार्मिकों के माध्यम से जमीनी स्तर तक पहुंचाएं, जिससे कि देश एक विकसित राष्ट्र की श्रेणी में अग्रणी भूमिका निभाये, इसलिए यहां पर यह आवश्यक हो जाता है कि हम सभी को श्रीमद्भगवत गीता के दर्शन को आत्मसात करते हुए, एक कर्मयोगी बनने की आवश्यकता है और यह तभी हो सकता है, जब हम जहां पर, जिस पद पर हैं उसको निष्ठा, लगन व ईमानदारी से निष्पादित करें। कर्मयोग की दृष्टि में पद कोई छोटा व बड़ा नहीं होता है अपितु प्रदत्त दायित्वों का निर्वहन हीं सर्वोपरि है। कार्यक्रम का संचालन डा० नवीन कुमार सिन्हा द्वारा किया गया तथा उपस्थित समस्त अधिकारियों, वार्ताकारों, विशिष्ट अतिथियों तथा प्रतिभागियों को, संस्थान के प्र0अपर निदेशक सुबोध दीक्षित द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन एवं प्रबंधन के दृष्टिगत संस्थान के सहायक निदेशक डा० राज किशोर यादव, डा० वरुण चतुर्वेदी, संकाय सदस्य धर्मेन्द्र कुमार सुमन, मोहित यादव, प्रचार सहायक मो० शहंशाह कम्प्यूटर प्रोग्रामर उपेन्द्र कुमार दूबे का सराहनीय एवं उल्लेखनीय योगदान रहा ।


