लखनऊ

खादी भारत की आज़ादी, स्वदेश और स्वावलंबन का प्रतीक है-सुरेश कुमार खन्ना

स्वदेशी से समृद्धि की ओर उत्तर प्रदेश, योगी सरकार के नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योगी प्रदर्शनी का शुभारंभ

लखनऊ में 10 दिवसीय खादी प्रदर्शनी में कारीगरों और उद्यमियों को मिल रहा है विपणन का बड़ा मंच

130 स्टॉलों के साथ मण्डल स्तरीय प्रदर्शनी से खादी के माध्यम से आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश का संकल्प

निश्चय टाइम्स डेस्क। खादी भारत की आज़ादी, स्वदेश और स्वावलंबन का प्रतीक है। महात्मा गांधी ने चर्खे के माध्यम से आमजन को आत्मनिर्भर बनने की दिशा दिखाई थी, जिसका साकार स्वरूप आज योगी सरकार के नेतृत्व में देखने को मिल रहा है। यें बातें 10 दिवसीय मण्डल स्तरीय खादी एवं ग्रामोद्योगी प्रदर्शनी-2025 का फीता काटकर प्रदर्शनी का उद्घाटन वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जनपद लखनऊ प्रभारी मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गोमती नगर, लखनऊ परिसर में कहीं उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में स्वच्छता, स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा, स्वरोजगार सृजन और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर खादी बोर्ड के संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी सिद्धार्थ यादव ने बताया कि यह प्रदर्शनी 18 से 27 दिसम्बर 2025 तक आमजन के लिए खुली रहेगी, जिसमें खादी, ग्रामोद्योग एवं माटीकला से जुड़े उत्पादों के कुल 130 स्टॉल लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी में लेदर उत्पाद, भदोही के कालीन, माटीकला से बने बर्तन एवं घरेलू सजावटी सामान, प्रतापगढ़ का आंवला मुरब्बा, वाराणसी की रेशम एवं सिल्क साड़ियां, राजस्थान के बीकानेरी पापड़ व नमकीन, उत्तराखंड के कोट, विभिन्न प्रकार की चादरें तथा हस्तशिल्प आधारित वस्त्र आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। प्रदर्शनी न केवल उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण स्वदेशी उत्पाद उपलब्ध करा रही है, बल्कि कारीगरों और उद्यमियों को विपणन का सशक्त मंच भी प्रदान कर रही है। इस मौके पर उद्यमियता विकास संथान के अखिलेश कुमार सिंह, वित्तीय सलाहकार मानवेन्द्र सिंह, परिक्षेत्रीय ग्रामोद्योग अधिकारी अजय पाल, जिला ग्रामोद्योग अधिकारी अवधेश गौतम सहित विभाग के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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