55वीं अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता: डिजिटल युग में मानवीय संवेदना को जोड़ने की पहल
निश्चय टाइम्स डेस्क।

डिजिटल संचार के तेज़ दौर में जहाँ भावनाएँ अक्सर स्क्रीन तक सिमट जाती हैं, वहीं भारतीय डाक विभाग ने मानवीय संवेदनाओं और रचनात्मक अभिव्यक्ति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। डाक विभाग द्वारा 55वीं यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) अंतरराष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता–2026 का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 9 से 15 वर्ष आयु वर्ग के स्कूली बच्चे भाग ले सकेंगे। इस वर्ष प्रतियोगिता का विषय “डिजिटल दुनिया में मानवीय जुड़ाव क्यों मायने रखता है” रखा गया है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए पोस्टमास्टर जनरल श्री कृष्ण कुमार यादव ने बताया कि यह प्रतियोगिता यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की एक वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य युवाओं में पत्र लेखन की कला, रचनात्मक सोच और संवेदनशील अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करना है। प्रतिभागियों को अपने किसी मित्र को संबोधित करते हुए हिंदी, अंग्रेज़ी या संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किसी भी भाषा में अधिकतम 800 शब्दों का पत्र लिखना होगा।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रविष्टियाँ 13 मार्च, 2026 तक भेजी जा सकती हैं। इच्छुक विद्यार्थी अपने विद्यालय के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, जिसमें जन्मतिथि सत्यापन, निर्धारित आवेदन-पत्र की दो प्रतियाँ और पासपोर्ट आकार की तीन नवीनतम फोटो अनिवार्य होंगी। सभी मंडलीय डाक अधीक्षकों को प्रतियोगिता के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं, ताकि अधिक से अधिक स्कूलों और छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित की जा सके।
श्री यादव ने बताया कि पत्रों का मूल्यांकन पहले परिमंडलीय स्तर पर किया जाएगा। चयनित श्रेष्ठ तीन प्रविष्टियाँ राष्ट्रीय स्तर पर डाक निदेशालय, नई दिल्ली भेजी जाएँगी। राज्य या परिमंडल स्तर पर प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः ₹25,000, ₹10,000 और ₹5,000 की पुरस्कार राशि प्रमाणपत्र सहित प्रदान की जाएगी। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर यह पुरस्कार राशि बढ़कर ₹50,000, ₹25,000 और ₹10,000 होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यूपीयू द्वारा स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के साथ प्रमाणपत्र और विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे। स्वर्ण पदक विजेता को यूपीयू मुख्यालय बर्न (स्विट्ज़रलैंड) की यात्रा का अवसर भी मिल सकता है।
पोस्टमास्टर जनरल ने कहा कि डिजिटल युग में हाथ से लिखा गया पत्र केवल संवाद नहीं, बल्कि भावनाओं की सजीव अभिव्यक्ति है। यह प्रतियोगिता युवाओं को ठहरकर सोचने, महसूस करने और मानवीय जुड़ाव की अहमियत समझने का अवसर प्रदान करती है।



