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रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए नीतिगत “इनेबलर्स” शहरी सहकारी बैंकों को अधिक सक्षम, स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध-आरबीआई गवर्नर

निश्चय टाइम्स डेस्क।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने 19 जनवरी 2026 को मुंबई में चुनिंदा शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के अध्यक्षों, प्रबंध निदेशकों (MD) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (CEO) तथा उद्योग प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। यह बैठक आरबीआई द्वारा विनियमित संस्थाओं के साथ निरंतर संवाद की प्रक्रिया का हिस्सा रही।

आरबीआई के अनुसार, इस तरह की पिछली बैठक 19 मार्च 2025 को आयोजित की गई थी। बैठक का उद्देश्य शहरी सहकारी बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर गहन विचार-विमर्श करना रहा।

बैठक में नेशनल अर्बन को-ऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड तथा नेशनल फेडरेशन ऑफ अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक एंड क्रेडिट सोसाइटीज लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। आरबीआई की ओर से उप गवर्नर स्वामीनाथन जे और एस.सी. मुर्मू सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन पर जोर

अपने संबोधन में आरबीआई गवर्नर ने कहा कि शहरी सहकारी बैंक ऋण संवितरण, विशेष रूप से कम सेवा-प्राप्त क्षेत्रों में, तथा वित्तीय समावेशन के विस्तार में लगातार अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारी बैंक जमीनी स्तर पर आम नागरिकों, छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लिए बैंकिंग व्यवस्था की मजबूत कड़ी बने हुए हैं।

गवर्नर ने पिछली बैठक के बाद सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए आरबीआई द्वारा किए गए विभिन्न नीतिगत प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कदम इस क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

फोकस | गवर्नेंस, एसेट क्वालिटी और ग्राहक विश्वास

आरबीआई गवर्नर ने स्पष्ट किया कि रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए नीतिगत “इनेबलर्स” शहरी सहकारी बैंकों को अधिक सक्षम, स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने बैंकों से उच्च स्तर के अभिशासन (गवर्नेंस) को बनाए रखने पर विशेष बल दिया।

उन्होंने कहा कि मजबूत हामीदारी (अंडरराइटिंग) प्रक्रियाएँ और आस्ति गुणवत्ता (एसेट क्वालिटी) पर निरंतर एवं सावधानीपूर्वक निगरानी बैंकिंग प्रणाली की मजबूती के लिए अनिवार्य है।

इसके साथ ही गवर्नर ने कहा कि ग्राहकों का विश्वास किसी भी बैंक की सबसे बड़ी पूंजी है। इसे बनाए रखने के लिए बैंकों को ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण, नैतिक बैंकिंग पद्धतियों का पालन और शिकायतों का समयबद्ध एवं पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना होगा।

नीतिगत चुनौतियों पर खुला संवाद

संवादात्मक सत्र के दौरान शहरी सहकारी बैंकों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र से जुड़ी नीतिगत समस्याओं और परिचालनगत चुनौतियों पर अपनी प्रतिक्रिया और सुझाव आरबीआई के समक्ष रखे। प्रतिभागियों ने नियामकीय प्रक्रियाओं, पूंजी आवश्यकताओं और परिचालन सुगमता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।

आरबीआई ने भरोसा दिलाया कि सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के सतत विकास, स्थिरता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करने के लिए इस तरह का संवाद आगे भी जारी रहेगा।

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