आरबीआई की सख्ती: नॉर्दर्न आर्क कैपिटल पर 2.70 लाख रुपये का जुर्माना
केवाईसी नियमों की अनदेखी, संदिग्ध लेन-देन पर निगरानी तंत्र न होने पर कार्रवाई

निश्चय टाइम्स डेस्क। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने नियामकीय नियमों के उल्लंघन को लेकर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी नॉर्दर्न आर्क कैपिटल लिमिटेड पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 2.70 लाख रुपये का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई आरबीआई द्वारा केवाईसी (Know Your Customer) दिशा-निर्देशों के अनुपालन में गंभीर लापरवाही पाए जाने के बाद की गई है।
आरबीआई ने यह दंड 29 जनवरी 2026 को जारी आदेश के माध्यम से लगाया, जो भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58G(1)(b) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है। यह जुर्माना मार्च 31, 2024 की वित्तीय स्थिति के आधार पर की गई वैधानिक जांच (Statutory Inspection) के बाद लगाया गया।
संदिग्ध लेन-देन की पहचान के लिए आईटी सिस्टम ही नहीं
आरबीआई की जांच में यह गंभीर तथ्य सामने आया कि कंपनी ने संदिग्ध लेन-देन (Suspicious Transactions) की पहचान और रिपोर्टिंग के लिए कोई प्रभावी आईटी सिस्टम या सॉफ्टवेयर ही स्थापित नहीं किया था। यह सीधे तौर पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े नियमों का उल्लंघन है।
नियामक संस्था ने इस संबंध में कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी द्वारा दिए गए जवाब, अतिरिक्त लिखित स्पष्टीकरण और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद भी आरबीआई इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि आरोप सही पाए गए हैं और दंडात्मक कार्रवाई आवश्यक है।
ग्राहकों के हितों और वित्तीय प्रणाली पर सवाल
हालांकि आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई किसी विशेष लेन-देन या ग्राहक अनुबंध की वैधता पर निर्णय नहीं है, लेकिन यह घटना कंपनी की आंतरिक नियंत्रण प्रणाली और अनुपालन संस्कृति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि यह जुर्माना भविष्य में संभावित अन्य नियामकीय कार्रवाई से मुक्त नहीं करता, यानी आगे और सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं।
नियामकीय चेतावनी
यह मामला वित्तीय संस्थानों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है कि केवाईसी और एंटी मनी लॉन्ड्रिंग (AML) नियमों में किसी भी तरह की ढिलाई अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।



