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‘मेगा टेक्सटाइल पार्क’ का मेगा दावा! हजारों करोड़ खर्च, लेकिन जमीन पर प्रगति धीमी?

रोज़गार के बड़े वादे, पर कई राज्यों में अभी आवेदन और कागज़ी तैयारी तक सीमित

निश्चयट टाइम्स डेस्क।

केंद्र सरकार ने देशभर में 7 पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क स्थापित करने की योजना को अंतिम रूप दे दिया है और इसके लिए 2027-28 तक 4,445 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है। सरकार का दावा है कि इस महत्वाकांक्षी योजना से करीब 3 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और हर पार्क में लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश आएगा। लेकिन मौजूदा स्थिति पर नजर डालें तो यह योजना अभी बड़े वादों और सीमित जमीनी प्रगति के बीच फंसी नजर आती है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्यों द्वारा बाहरी अवसंरचना के लिए 2,160 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं शुरू की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक केवल लगभग 564 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं। इससे परियोजना की गति पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े निवेश के दावों के बावजूद कई राज्यों में प्रक्रिया अभी जमीन आवंटन और आवेदन तक सीमित है।

महाराष्ट्र में अभी भूमि आवंटन के लिए आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं, जबकि तमिलनाडु में 100% जमीन अधिग्रहण के बावजूद निवेश प्रस्ताव अपेक्षा से कम बताए जा रहे हैं। तेलंगाना में कुछ जमीन आवंटन हुआ है, लेकिन कुल निवेश की रफ्तार पर स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई। मध्य प्रदेश में बड़े निवेश प्रस्तावों की घोषणा जरूर हुई है, पर वास्तविक निवेश कब शुरू होगा, यह अभी अनिश्चित है।

सबसे अहम सवाल उत्तर प्रदेश के लखनऊ में प्रस्तावित पार्क को लेकर भी उठ रहा है—क्या यह परियोजना तय समय में धरातल पर उतर पाएगी या अन्य बड़ी औद्योगिक योजनाओं की तरह फाइलों में ही अटक जाएगी?

सरकार ने राज्यों, निवेशकों और डेवलपर्स के साथ 200 से ज्यादा परामर्श करने की बात कही है, लेकिन उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि परामर्श से ज्यादा जरूरी तेज क्रियान्वयन है। टेक्सटाइल सेक्टर पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा, लागत दबाव और मांग में उतार-चढ़ाव से जूझ रहा है—ऐसे में देरी भारत की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल, सरकार ने साफ कर दिया है कि नए पीएम मित्र पार्क का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या घोषित 7 पार्क ही समय पर बन पाएंगे या “मेगा” योजना सिर्फ कागजी उपलब्धि बनकर रह जाएगी।

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