वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भारत की राह पर मंथन, विशेषज्ञों ने दी रणनीतिक मजबूती की सलाह
ट्रंप, चीन और रूस की बदलती नीतियों के बीच भारत की कूटनीति, रक्षा और आर्थिक शक्ति पर गहन चर्चा

निश्चयट टाइम्स डेस्क। तेजी से बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और वैश्विक तनावों के बीच भारत की भविष्य की दिशा पर गंभीर मंथन करते हुए मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश ने गुरुवार शाम सर पदमपत सिंघानिया ऑडिटोरियम में एक विशेष टॉक शो का आयोजन किया। कार्यक्रम का विषय था – “India’s Path Ahead Amid Trump’s Turbulence, China’s Game, Russia’s Resilience and More.”
टॉक शो में प्रमुख वक्ताओं के रूप में मेजर जनरल (से.नि.) राजीव नारायणन, कर्नल (से.नि.) अजय के. रैना तथा प्रसिद्ध यूट्यूब चैनल YT-DEF Talks के आदी अचिंत ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत चैंबर के अध्यक्ष अभिषेक सिंघानिया के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को समझना और भारत की रणनीतिक भूमिका पर विचार करना समय की आवश्यकता है।

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज दुनिया एक नए शक्ति संतुलन की ओर बढ़ रही है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की नीतिगत अनिश्चितताएँ, चीन की आक्रामक आर्थिक और सामरिक रणनीति तथा रूस की निरंतर प्रभावशाली उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे रही है। ऐसे दौर में भारत को अपनी कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट और मजबूत रखना होगा।
विशेषज्ञों ने रूस-यूक्रेन युद्ध, पाकिस्तान और ईरान की क्षेत्रीय परिस्थितियों, वेनेजुएला की अस्थिरता, बांग्लादेश के बदलते हालात और वैश्विक संघर्षों में अमेरिका की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अपनी प्राचीन सभ्यता, मजबूत लोकतांत्रिक परंपरा और बढ़ती आर्थिक ताकत के कारण भारत किसी भी बड़े राष्ट्र के दबाव में आए बिना विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। पिछले एक वर्ष की अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद भारत की उच्च आर्थिक विकास दर और दृढ़ विदेश नीति ने विश्व समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।
वक्ताओं का मानना था कि भारत को अमेरिका, यूरोप, रूस और एशिया-प्रशांत देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति जारी रखनी चाहिए। साथ ही, चीन के बढ़ते प्रभाव को ध्यान में रखते हुए रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना, तकनीकी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
चर्चा के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि भारत के पास वैश्विक दक्षिण (Global South) का नेतृत्व करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यदि भारत विकासशील देशों की आवाज़ को प्रभावी रूप से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता है, तो वह विश्व राजनीति में एक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
कार्यक्रम के अंत में आयोजित इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र में उपस्थित जनों ने विशेषज्ञों से कई गहन प्रश्न पूछे, जिनका वक्ताओं ने विस्तार से उत्तर देकर विषय को और स्पष्ट किया।
समापन अवसर पर चैंबर के उपाध्यक्ष मयंक खन्ना ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल सामरिक समझ को बढ़ाते हैं, बल्कि निरंतर सीखने की परंपरा को भी मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर चैंबर के पूर्व अध्यक्ष बी.के. लाहोटी और मुकुल टंडन, काउंसिल सदस्य विजय पांडे, आर.के. अग्रवाल, सुशील शर्मा, आशीष चौहान, विश्वनाथ गुप्ता, सदस्य गुलशन धूपर, डॉ. अवध दुबे, अनिल के. सक्सेना तथा मुख्य परिचालन अधिकारी प्रभात मिश्रा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।


