कौशल विकास की बैठकों में बड़े दावे, जमीनी हकीकत अब भी सवालों के घेरे में
एनएसक्यूसी की 45वीं बैठक में 80 योग्यताओं को मंजूरी, लेकिन बेरोजगारी और स्किल गैप पर ठोस समाधान अब भी अधूरा
निश्चय टाइम्स डेस्क। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की सचिव और एनसीवीईटी की अध्यक्ष श्रीमती देबाश्री मुखर्जी की अध्यक्षता में 6 फरवरी 2026 को नेशनल स्किल्स क्वालिफिकेशंस कमेटी (एनएसक्यूसी) की 45वीं बैठक आयोजित की गई। बैठक में देशभर में व्यावसायिक योग्यताओं की गुणवत्ता और उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बनाने के प्रस्तावों पर चर्चा हुई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बैठकों के बावजूद स्किल डेवलपमेंट सेक्टर की कई पुरानी चुनौतियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
बैठक में एनसीवीईटी के कार्यकारी सदस्य प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार गाबा, निदेशक एवं सचिव डॉ. सुहास देशमुख सहित ग्रामीण विकास और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रतिनिधि मौजूद रहे। कुल 15 अवॉर्डिंग बॉडीज ने समिति के समक्ष अपनी योग्यताएं प्रस्तुत कीं, जिनमें से 80 पर विचार किया गया। इन प्रस्तावों में डीजीटी, एनआईईएलआईटी, IN-SPACe और विभिन्न सेक्टर स्किल काउंसिल शामिल थे।
हालांकि ऑटोमोटिव, आईटी, हेल्थकेयर, एयरोस्पेस, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन जॉब्स और उभरती तकनीकों जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर पर फोकस की बात कही गई, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये पाठ्यक्रम वास्तव में युवाओं को रोजगार दिला पाएंगे? देश में पहले से चल रही कई स्किल योजनाओं पर यह आरोप लगते रहे हैं कि ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी बड़ी संख्या में युवाओं को नौकरी नहीं मिलती।
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कोर्स को “स्किलिंग फॉर एआई रेडीनेस (SOAR)” पहल के तहत मंजूरी देना रहा। इसे इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के प्री-इवेंट से जोड़ा गया है। लेकिन डिजिटल और एआई स्किल्स की बात तब तक अधूरी मानी जाएगी, जब तक ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेनिंग क्वालिटी उपलब्ध नहीं कराई जाती।
समिति ने परिणाम-आधारित डिजाइन, कड़े असेसमेंट और इंडस्ट्री वैलिडेशन पर जोर दिया। इसके बावजूद उद्योग जगत लंबे समय से यह शिकायत करता रहा है कि प्रशिक्षित उम्मीदवारों में व्यावहारिक कौशल की कमी रहती है। ऐसे में केवल नई योग्यताओं को मंजूरी देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
बैठक को संबोधित करते हुए देबाश्री मुखर्जी ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था के अनुरूप स्किल क्वालिफिकेशन को मजबूत बनाना बेहद जरूरी है और यह पहल विकसित भारत 2047, नई शिक्षा नीति और नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगी। मगर वास्तविक चुनौती इन नीतियों को कागज से जमीन पर उतारने की है।
एनएसक्यूसी के ताजा फैसले भले ही स्किलिंग सेक्टर को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बताए जा रहे हों, लेकिन जब तक ट्रेनिंग की गुणवत्ता, प्लेसमेंट और उद्योगों के साथ वास्तविक तालमेल सुनिश्चित नहीं होता, तब तक ऐसी बैठकों के परिणामों पर सवाल उठते रहेंगे। युवाओं को सिर्फ प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार चाहिए—और यही कसौटी इन योजनाओं की असली परीक्षा होगी।



