जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी के आधार वर्ष में बदलाव की तैयारी
नई डेटा प्रणाली से बढ़ेगी सटीकता और वैश्विक तुलनीयता

निश्चय टाइम्स डेस्क। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने देश के प्रमुख आर्थिक संकेतकों—सकल घरेलू उत्पाद (GDP), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI)—के आधार वर्ष में संशोधन के लिए व्यापक प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल का उद्देश्य इन आंकड़ों की प्रासंगिकता, सटीकता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुलनीयता को मजबूत करना है।
मंत्रालय के अनुसार, आधार वर्ष संशोधन का मार्गदर्शन संबंधित तकनीकी सलाहकार समितियां करेंगी, जिनमें शिक्षाविद, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि तथा भारतीय रिजर्व बैंक के विशेषज्ञ शामिल होंगे। इस संशोधन प्रक्रिया में कार्यप्रणाली को बेहतर बनाना, नए डेटा स्रोतों को शामिल करना और विभिन्न सेक्टरों के भार को अपडेट करना प्रमुख कदम होंगे।
सरकार ने नई श्रृंखलाएं जारी करने की समयसीमा भी तय कर दी है। सीपीआई की नई श्रृंखला 12 फरवरी 2026, जीडीपी की 27 फरवरी 2026, जबकि आईआईपी की नई श्रृंखला मई 2026 में जारी किए जाने की संभावना है। ये संकेतक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के स्पेशल डेटा डिसेमिनेशन स्टैंडर्ड (SDDS) का पालन करते हैं, जिसमें डेटा कवरेज, आवधिकता, समयबद्धता, सार्वजनिक पहुंच, सत्यता और गुणवत्ता जैसे महत्वपूर्ण मानक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती अर्थव्यवस्था, नई उपभोक्ता आदतों और औद्योगिक ढांचे को देखते हुए समय-समय पर आधार वर्ष का संशोधन आवश्यक होता है। इससे आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर सामने आती है और नीतिगत फैसले अधिक प्रभावी बनते हैं।
इस संबंध में जानकारी देते हुए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राव इंद्रजीत सिंह ने राज्यसभा में लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि यह कदम देश की आर्थिक डेटा प्रणाली को अधिक आधुनिक और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
आधार वर्ष में यह बदलाव न केवल नीति निर्माताओं बल्कि निवेशकों, उद्योग जगत और शोधकर्ताओं के लिए भी अहम साबित होगा, क्योंकि इससे भारत की आर्थिक स्थिति का अधिक यथार्थ आकलन संभव हो सकेगा।


