
🟥 सैनिकों के नाम पर मैराथन, सवाल ज़मीनी सरोकारों पर
निश्चय टाइम्स डेस्क। देश के अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) ने अपने 132वें स्थापना दिवस से पहले ‘पीएनबी सोल्जरथॉन 2026’ की घोषणा कर एक बार फिर बड़े मंच और बड़े संदेश का सहारा लिया है। द्वारका स्थित कॉर्पोरेट कार्यालय में हुए इस आयोजन में बैंक ने इसे सैनिकों के सम्मान और फिटनेस आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या ऐसे आयोजनों से सैनिकों और आम नागरिकों की वास्तविक समस्याओं का समाधान होता है?
‘सैनिकों के साथ दौड़, सैनिकों के लिए दौड़’ जैसे भावनात्मक नारे के साथ आयोजित इस हाफ मैराथन को राष्ट्रीय आंदोलन बताया गया। बैंक प्रबंधन का दावा है कि यह पहल अनुशासन, फिटनेस और राष्ट्रीय गौरव को बढ़ावा देगी। लेकिन आलोचकों का मानना है कि बैंकिंग सेक्टर आज जिन चुनौतियों—एनपीए, स्टाफ संकट और ग्राहक सेवा—से जूझ रहा है, उन पर ऐसे आयोजनों की चकाचौंध पर्दा डालने का काम भी करती है।
प्री-लॉन्च में शामिल हुए पूर्व स्पेशल फोर्स अधिकारी मेजर डॉ. सुरेंद्र पूनिया और पीएनबी के एमडी एवं सीईओ अशोक चंद्र ने इसे सशस्त्र बलों के प्रति श्रद्धांजलि बताया। बैंक ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को भी इस थीम से जोड़ा। हालांकि, यह सवाल अनुत्तरित है कि सैनिकों के कल्याण के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय या संस्थागत सहयोग कितना बढ़ेगा?
टी-शर्ट, मेडल और शॉर्ट फिल्म के अनावरण के साथ कार्यक्रम भव्य रहा, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह बहस जारी है कि क्या ऐसे आयोजनों से राष्ट्र निर्माण होता है या यह सिर्फ कॉर्पोरेट ब्रांडिंग का विस्तार है।



