
🟥 श्रमिकों–किसानों के अधिकारों पर सीधा हमला!
निश्चय टाइम्स डेस्क। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और स्वतंत्र क्षेत्रीय फेडरेशनों के संयुक्त मंच ने 12 फरवरी 2026 को देशव्यापी आम हड़ताल और बड़े पैमाने पर जनआंदोलन का आह्वान किया है। यह ऐलान प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया गया, जहां केंद्र सरकार की नीतियों को श्रमिक-विरोधी, किसान-विरोधी और कॉरपोरेट-परस्त बताया गया।
संयुक्त मंच का आरोप है कि केंद्र सरकार ने बिना किसी परामर्श, अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों की अनदेखी करते हुए चार श्रम संहिताएं थोप दीं, जिनका उद्देश्य ट्रेड यूनियनों को कमजोर करना और मजदूरों के हड़ताल के अधिकार को खत्म करना है। यूनियनों का कहना है कि इन कानूनों से करीब 70 प्रतिशत उद्योग श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे, जिससे मजदूर पूरी तरह मालिकों की दया पर निर्भर हो जाएंगे।
संयुक्त किसान मोर्चा और कृषि मजदूर संगठनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। खास तौर पर मनरेगा की बहाली और ग्रामीण रोजगार की गारंटी खत्म किए जाने के फैसले को लेकर भारी नाराजगी है। यूनियनों का आरोप है कि सरकार “कल्याणकारी राज्य” की अवधारणा से पीछे हट रही है।
हड़ताल ऐसे समय में हो रही है जब देश बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रहा है। सरकार पर आरोप है कि वह 65 लाख से अधिक खाली सरकारी पदों को भरने के बजाय ठेका प्रथा को बढ़ावा दे रही है। वहीं, सार्वजनिक उपक्रमों—रेलवे, बैंक, बीमा, ऊर्जा, बंदरगाह—के निजीकरण को तेज़ किया जा रहा है।
यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने श्रमिकों, किसानों, युवाओं और महिलाओं की आवाज़ नहीं सुनी, तो यह संघर्ष और व्यापक होगा। 12 फरवरी की हड़ताल को लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया गया है।



