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RBI का सख्त संदेश: भ्रामक विज्ञापन और मिस-सेलिंग पर कसा जाएगा शिकंजा

बैंकों–NBFCs के लिए ड्राफ्ट संशोधन जारी, 4 मार्च 2026 तक मांगी गई सार्वजनिक राय

निश्चय टाइम्स न्यूज डेस्क। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के विज्ञापन, मार्केटिंग और बिक्री को लेकर बड़ा कदम उठाया है। 6 फरवरी 2026 को जारी विकासात्मक और नियामकीय नीतियों के बयान के अनुरूप, RBI ने सभी बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए ‘Responsible Business Conduct’ से संबंधित ड्राफ्ट संशोधन निर्देश जारी किए हैं। इनका उद्देश्य ग्राहकों को भ्रामक प्रचार, मिस-सेलिंग और डिजिटल “डार्क पैटर्न” जैसी भ्रामक रणनीतियों से बचाना है।

अब तक बीमा एजेंसी कारोबार के संदर्भ में ग्राहक उपयुक्तता और उपादेयता से जुड़े निर्देश केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (RRBs को छोड़कर) और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों तक सीमित थे। समीक्षा के बाद RBI ने दायरा बढ़ाते हुए सभी बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, पेमेंट्स बैंकों, लोकल एरिया बैंकों, RRBs, शहरी व ग्रामीण सहकारी बैंकों, ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, NBFCs और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों को शामिल किया है।

ड्राफ्ट निर्देशों में डायरेक्ट सेल्स एजेंट्स (DSAs) और डायरेक्ट मार्केटिंग एजेंट्स (DMAs) की गतिविधियों, थर्ड-पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री, पारदर्शिता मानकों, ग्राहक की सहमति, और भ्रामक डिजिटल इंटरफेस (डार्क पैटर्न) पर नियंत्रण जैसे पहलुओं को समाहित किया गया है। RBI ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वित्तीय संस्थानों की जिम्मेदारी केवल उत्पाद बेचने तक सीमित नहीं, बल्कि ग्राहक हितों की सुरक्षा तक है।

इसके अलावा, ‘Undertaking of Financial Services Directions, 2025’ के तहत एजेंसी बिजनेस और रेफरल सेवाओं के नियामकीय ढांचे की भी समीक्षा की गई है और संबंधित श्रेणियों के लिए अलग-अलग ड्राफ्ट संशोधन जारी किए गए हैं।

RBI ने नियामित संस्थाओं, हितधारकों और आम जनता से 4 मार्च 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। फीडबैक ‘Connect 2 Regulate’ पोर्टल या ईमेल के माध्यम से भेजा जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता संरक्षण को नई मजबूती देगा।

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